छत्तीसगढ़

चेपटाखोल एनीकट जिसने डोकराभाठा को बारिश में कटने से बचाया

1988 में बना था चेपटाखोल डायवर्सन लेकिन अगले ही साल हो गया था खराब

फिर 2008 में जीर्णोद्धार हुआ, फिर भी सफल नहीं हो सका

आखिर में मनरेगा कन्वर्जेंस से बनाए अब हो रही 500 एकड़ में सिंचाई

राजनांदगांव : पिछले कई सालों से डोकराभाठा-खैरागढ़ सड़क भारी बारिश में डूब जाती थी और हजारों लोगों का संपर्क आपस में कट जाता था। इस समस्या के हल के लिए और किसानों को पानी उपलब्ध कराने 1988 में चेपटाखोल डायवर्सन तैयार कराया गया था लेकिन स्ट्रक्चर में तकनीकी समस्या होने की वजह से अगले साल ही बेकार हो गया।

2008 में जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने इसके जीर्णोद्धार की कोशिश की लेकिन यह भी सफल नहीं रही। डायवर्सन नहीं होने की वजह से बाढ़ का पानी हर साल सड़क में पहुँच जाता और डोकराभाठा-खैरागढ़ सड़क डूब जाती। वर्ष 2016 -17 में एक बार पुन: चेपटाखोल डायवर्सन के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया। इस बार विंग वॉल की ऊँचाई दूसरी ओर से बढ़ाई गई। पिछले साल 45 दिनों में यह कार्य पूरा किया गया। कार्य की लागत 49 लाख रुपए रही। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों को रोजगार भी प्राप्त हुआ। डायवर्सन में पानी आ जाने से बाढ़ के पानी को संग्रहीत किया जा सका, इससे डोकराभाठा-खैरागढ़ की ओर जाने वाला पानी का बड़ा फ्लो रोका जा सका।

इसके साथ ही जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से समन्वय भी किया। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क की ऊँचाई एक किमी बढ़ा दी। इसका अच्छा नतीजा हुआ और खैरागढ़-डोकराभाठा सड़क में बरसात के दिनों में आने वाली दिक्कत दूर हो गई। डायवर्सन बनने के पहले वर्ष सुखद नतीजे रहे। किसानों की 500 एकड़ भूमि सिंचित हुई। इससे लगभग 300 किसान परिवार लाभान्वित हुए। इन परिवारों की उपज पिछले साल की तुलना में 4000 क्विंटल बढ़ गई।

सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता ग्राहम ने बताया कि इस बार डायवर्सन बनाने के लिए विंग वॉल के बैरियर को 22 मीटर रखा गया और ऊँचाई पाँच मीटर रखी गई, यह सफल हुआ और अब बेहतर तरीके से सिंचाई हो रही है। मनरेगा एपीओ प्रथम अग्रवाल ने बताया कि चेपटाखोल डायवर्सन चार गांवों के लिए संजीवनी की तरह साबित हुआ है। इनमें खजरी, ढोलियाकन्हार, केराबोरी और पेंड्री भी शामिल हैं। इन गाँवों के लोग बेहद खुश हैं। पहले तो इन्हें मनरेगा के माध्यम से बेहतर रोजगार मिल गया, फिर खेतों में सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध हो गया। बाढ़ में सड़क संपर्क कट जाने की समस्या भी दूर हो गई।

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