जंगल बचाने नवाचार पर वन मंत्री ने दिया जोर

रायपुर: राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र में भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत हुई। वन मंत्री महेश गागड़ा ने सोमवार को इसकी शुरुआत की। यह प्रशिक्षण `वानिकी के क्षेत्र में नए पहल – अवसर और चुनौतियां विषय पर 29 जनवरी से 2 फरवरी तक होगा।

प्रशिक्षण में देश के विभिन्न राज्यों जैसे- बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, उत्तरांखड, असम, लक्षद्वीप आदि से भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारी शामिल हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव सीके खेतान भी उपस्थित थे।

मंत्री गागड़ा ने इस अवसर पर वनों के आजीविका और पारिस्थितिकीय महत्व को बताते हुए वानिकी क्षेत्रों में आधुनिक नवाचारों को शामिल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वनों के संरक्षण और संवर्धन में सामुदायिक और पारंपरिक ज्ञान को अपनाने की बात कही।

वन विभाग के अपर मुख्य सचिव सी. के. खेतान ने उपस्थित प्रतिभागियों से अपने-अपने राज्यों में वानिकी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य को अवगत कराने के लिए सुझाव दिया। साथ ही राज्य में वनों को बचाने के किए जा रहे कुशल प्रयासों को देश के विभिन्न राज्यों में लागू किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक डॉ. ए. ए. बोआज ने प्रशिक्षण में आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रुपरेखा का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने वानिकी के क्षेत्र में नवाचारों की आवश्यकता और महत्व की जानकारी दी।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में दुर्ग वन वृत्त से मुख्य वन संरक्षक प्रेम कुमार की ओर से सतत् विकास लक्ष्य की प्राप्ति में वानिकी क्षेत्र की भूमिका विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। कोरिया वनमण्डल के वनमण्डलाधिकारी इमोतेम्सू आओ की ओर से राज्य में कृषि वानिकी क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और वनमण्डलाधिकारी, रायगढ़, विजया कुर्रे की ओर से महानदी बेसिन में किए जा रहे जल संरक्षण के प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया।

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