दो किसानों का आत्महत्या राज्य सरकार के नाकामी का प्रमाण: अजीत जोगी

रायपुर : जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के संस्थापक अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी ने कहा कि बागबाहरा के ग्राम मोखा के किसान मनखीर ध्रुव की फसल खराब होने व प्रधानमंत्री फसल बीमा द्वारा मुआवजा नहीं मिलने के कारण आत्महत्या करना बेहद दुखद है। इसके 5 दिन पूर्व खैरागढ़ के किसान स्व. भूषण गायकवाड़ ने भी किसानी कार्य में लागत मूल्य नहीं निकलने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इससे यह स्पष्ट है कि डाॅ रमन सिंह लोक सुराज अभियान के नाम से शासकीय पैसे का दुरूपयोग कर गांव गांव घूम कर अपनी व प्रधानमंत्री मोदी की बांडिग तो किया किन्तु धरातल में प्रदेश के गरीब मजदूर किसानो की वास्तविक स्थिती की खबर नही ली । मुख्यमंत्री डा रमन सिंह झोपड़ी बनाती मजदूर महिला के सार्थ इंट उठाते हुए फोटो तो खिंचवाया किन्तु मेहनतकश के जीवन स्तर को ऊॅचा उॅठाने का ख्याल फोटो की चकाचैध में भूल गये। इसका ही दूष्परिणाम है कि लगातार 13 वर्षो तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी नेशनल क्राइम रिसर्च ब्यूरो ने 800 किसानो के प्रति वर्ष छत्तीसगढ़ में आत्महत्या की रिर्पोट पेश की है, जिसमें मुख्यमंत्री के जिले राजनांदगांव व कवर्धा में सर्वाधिक है। श्री अजीत जोगी ने बागबाहरा स्थित ग्राम मोखा के आदिवासी किसान मनखीर ध्रुव 58 की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण किये आत्महत्या के कारणों की जांच के लिये पूर्व विधायक श्री परेश बागबाहरा की अध्यक्षता में 10 सदस्यी जांच दल का गठन किया था।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता सुब्रत डे ने बताया कि जांच दल में श्री परेश बागबाहरा ( पूर्व विधायक), छोटे मियां (जिला अध्यक्ष महासमुंद), दीपक सिन्हा ( जिलाध्यक्ष माहासमुंद किसान विभाग) सिकंदर ठाकुर (प्रभारी सरायपाली जिला ), गणेश शर्मा, नंदकुमार चंद्राकर, रमेश निषाद, अल्लास चंद्राकर, पारस सांखला, हरीशंकर यादव, थे। जिन्होने मृतक की पत्नी समारीन बाई, पुत्र देवीसिंह ध्रुव (35) वर्ष व मोहन सिंह ध्रुव (30) वर्ष से मिले एवं परिवार के दुःख में सहभागी बने। परिजनों ने बताया कि मृत किसान स्व. मनखीर ध्रुव पर 8 लाख का कर्ज था। खरीब की फसल अकाल के कारण खराब हो गयी थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा की राशि प्राप्त नही हुई है। इसके पूर्व रबी की फसल कर्ज लेकर लगाया था , किन्तु ट्युबवेल सुख जाने के कारण फसल बरबाद हो गयी। मृतक किसान ने रबी फसल को बचाने के उददेश्य से एक नया ट्युबवेल खोदवाया किन्तु पानी के कमी के कारण उसके बोर सूखा निकल गया । जिसके कारण मृतक किसान काफी परेशान था। क्षेत्रीय विधायक सहित सभी विभागों के अधिकारीयों से मिला किन्तु किसी के द्वारा भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलने के कारण आहत किसान ने आत्महत्या कर ली। इस दौरान वहां उपस्थित गांव वालो ने प्रतिनिधीमंडल को बताया कि स्व. मनखीर ध्रुव के सामान क्षेत्र के समस्त किसान बेहद परेशान है। प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना के लिये आनावरी रिर्पोट को प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी द्वारा सही नही बनाया जाता। जिम्मेदार अधिकारी स्थल निरीक्षण न कर छोटे कर्मचारी को भेज देते है जिनका कोई तकनीकि ज्ञान नहीं होता है। इस कारण किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ गलत रिर्पोट के कारण उचित मुआवजा नहीं मिल पाता और राज्य सरकार भी इस मुददे पर गम्भीर नहीं है।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ प्रतिनिधीमंडल ने गांव वालों के सहमति से मांग की है कि (1) मृतक किसान के परिजनों को 1 करोड़ का मुआवजा दिया जाये। (2) मृतक किसान के किसी एक आश्रित को शासकीय नौकरी दी जाये। (3) किसानों के प्र्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राज्य सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैयै के कारण किसान को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता अतः अब आनावरी रिर्पोट की पुनः मुल्याकन कर वास्तविक सोशल आॅडिट (सामाजिक अंकेक्षक ) कर सरकार जब सींचित व अंसीचित दोनो पर प्रीमीयम लेती है ऐसी स्थिती में मुआवजा भी दोनो प्रकार से दिया जाये। (4) मनरेगा में लंबित पड़े 2 साल का बकाया भुगतान किया जाये।

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