बस्तर में तसर कृषक दिवस पर कार्यक्रम हुआ

जगदलपुर: बुनियादी बीज प्रगुणन और प्रशिक्षण केन्द्र, केन्द्रीय रेशम बोर्ड, बस्तर के तत्वाधान में विगत दिवस एक दिवसीय तसर कृषक दिवस बस्तर में हुआ। इसके मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य मनीराम कश्यप थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद पंचायत की अध्यक्ष शकुन्तला कश्यप ने की। इस अवसर पर अरुण परिहार,, डॉ.व्ही.एस. राजपूत बस्तर तथा डॉ.एस.के. पटनायक सेवा निवृत वैज्ञानिक विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित थे।

वैज्ञानिक सह संयुक्त निदेशक डॉ.जी.पी. महोबिया ने कहा कि तसर कीटपालन की प्रत्येक फसल उपरांत कृषकों से उनके अनुभवों और कीटपालन के दौरान आई समस्याओं के निवारण बाबत विचार-विमर्श के लिए तसर कृषक दिवस किया जाता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी बीज प्रगुणन और प्रशिक्षण केन्द्र केन्द्रीय रेशम बोर्ड बस्तर केन्द्र ने वर्ष 2017 में कृषक तथा विभागीय स्तर पर तसर कीटपालन कर गुणवत्ता युक्त बीज कोसा का निर्माण किया गया। इससे 4,55,550 स्वस्थ डिम्ब समूह का उत्पादन किया गया। इस तरह स्वस्थ डिम्ब समूह उत्पादन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। हिन्दी राजभाषा के क्रियान्वयन में भी इस केन्द्र को केन्द्रीय रेशम बोर्ड की ओर से प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।

रेशम विभाग के उप संचालक ए.के. श्रीवास्तव ने कहा कि रेशम विभाग कृषकों को कीटपालन से संबंधित स्वस्थ डिम्ब समूह व अन्य उपकरण मुफ्त में प्रदान कर रहा है। केन्द्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों का उन्हें पूर्ण सहयोग मिल रहा है तथा कोसा उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है। बस्तर में पहले 5-6 केन्द्रों में तसर कीटपालन का कार्य हो रहा था जो बढकर आज 26 केन्द्रों पर कार्य हो रहा है। तसर पौधों का पौधरोपण 51 हेक्टेयर क्षेत्र से बढकर आज 700 हेक्टेयर हो गया है, जिसमें से मात्र 300-400 हेक्टेयर क्षेत्र में ही किसान कीटपालन का कार्य कर लगभग 50 लाख कोसों का उत्पादन कर रहे हैं। यदि पूरे 700 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कीटपालन कार्य हो तो एक से डेढ करोड़ कोसा का उत्पादन हो सकता है।

सेवा निवृत वैज्ञानिक डॉ.एस.के. पटनायक ने कहा कि बुनियादी बीज प्रगुणन और प्रशिक्षण केन्द्र में पहले सिर्फ 18000 स्वस्थ डिम्ब समूह का उत्पादन किया जाता था परन्तु आज उत्पादन का स्तर ऊंचा उठकर लगभग 5 लाख स्वस्थ डिम्ब समूह हो गया है। यह सभी केन्द्र के अधिकारियों-कर्मचारियों व राज्य रेशम विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के सहयोग से ही संभव हुआ है।

इस अवसर पर डॉ.व्ही.एस. राजपूत व शकुन्तला कश्यप ने कृषकों का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में आगे आएं व अपनी मेहनत से कीटपालन कर आर्थिक उन्नति करें। मुख्य अतिथि मनीराम कश्यप ने कृषकों को सलाह दी कि वे केन्द्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक व तकनीकी कर्मचारियों के अनुभवों व राज्य रेशम विभाग से मिल रही सुविधाओं का लाभ उठाएं। बस्तर में उपलब्ध तसर खाद्य पौधों की उपलब्धता यहां की जलवायु तसर कीटपालन केे बहुत अनुकूल है जो बस्तर के लिए एक वरदान है। सभी कृषकों को इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठायें व कोसा उत्पादन कर आर्थिक उन्नति करें।

इस कार्यक्रम में केन्द्रीय रेशम बोर्ड व राज्य रेशम विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा लगभग तसर किसान उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन जी. गोपाल राव व धन्यवाद ज्ञापन अंजना दुबे ने किया।

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