मितानिनें जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए जनता को जागरूक करने प्रण लें : आयुक्त

रायपुर : नगर निगम रायपुर के स्वास्थ्य विभाग ने शहीद स्मारक भवन में 200 से अधिक शहरी मितानिनों को नागरिकों के मध्य जलजनित वर्षाकालीन, मच्छरजनित रोगों की कारगर रोकथाम के लिए सघन जनजागरण अभियान चलाने प्रशिक्षण दिया। विषय विशेषज्ञों, चिकित्सकों, अधिकारियों द्वारा टिप्स देकर प्रशिक्षित किया गया।
नगर निगम रायपुर के आयुक्त रजत बंसल ने सभी शहरी मितानिनों की भूमिका को शहर के लोक स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण निरूपित किया। निगम आयुक्त ने मितानिनों से निगम मित्र बनकर नागरिकों के मध्य जनस्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागृति लाने का कार्य प्रण लेकर करने का आव्हान मंच से किया। आयुक्त ने शहरी मितानिनों से वार्डो की समस्याओं पर चर्चा कर सुझाव मांगे एवं शहरी मितानिन के सुझाव पर मंच से ही सभी जोन कमिश्नरों को जोन स्तर पर वार्डो में खाली प्लाटों का कचरा व गंदगी हटाने जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु अभियान चलाने के निर्देश दिये।
आयुक्त श्री बंसल ने इस कार्य के लिए प्रशासनिक कार्य दायित्व कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के डॉ. प्रीतम मिश्रा को सौंपा । आयुक्त ने कहा कि, शहरी मितानिनों को नगर निगम के जोन के जोन कमिश्नरों व जोन स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर जनजागरण नागरिकों के मध्य करने का प्रण लेना चाहिए। आयुक्त ने जोन कमिश्नरो को सभी जोनो के कार्यालय में जोन स्तर के वार्डो में कार्यरत मितानिनों का परिचयात्मक सम्मेलन बुलाकर उनसे परिचय व उनका सम्पर्क मोबाईल नंबर प्राप्त कर जोन अधिकारियों , स्वास्थ्य अमले का संपर्क मोबाईल नंबर उन्हें देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जन स्वास्थ्य जागरूकता अभियान प्रभावी तरीके से चलाने के लिए दिये।
आयुक्त श्री बंसल ने मितानिनों को आश्वस्त किया कि, उनकी समस्याओं का नगर निगम रायपुर के स्तर पर हर संभव निदान करने वे आवश्यक कार्यवाही करवायेंगे। जो समस्याएं शासन स्तर की है उनके बारे में वे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध करने एवं पहल करने का कार्य करेंगे। आयुक्त ने कहा मितानिन समाज व शासन की व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण व आवश्यक कड़ी है। अब नगर निगम के जोन स्वच्छता अमले एवं शहरी मितानिन आपस में सहयोग व समन्वय रखकर जनहित में जनस्वास्थ्य जागरूकता हेतु आवष्यक पहल व कार्य करेंगे । ताकि बीमारी के कारण पनपने ही न पाये।
कार्यशाला में शहरी मितानिनों को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिन्हा, मलेरिया रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार सिंह, शहरी मितानिन समन्वयक प्रियंका ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में स्वतंत्र कुमार एवं श्री अंशुल, नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के उपसंचालक डॉ. अमृत चोपड़ा, निगम अपर आयुक्त आशीष टिकरिहा, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. प्रीतम मिश्रा, निगम स्वास्थ्य अधिकारी विजय पांडे ने संबोधन देते हुए वर्षाजनित , जलजनित , मच्छरजनित रोगों की समाज हित में कारगर रोकथाम के लिए लोगों के मध्य जनजागरण अभियान चलाने महत्वपूर्ण टिप्स दी।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों व अधिकारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शहरी मितानिनों को मच्छरजनित रोग, डेंगू एवं मलेरिया के कारणो बचाव व उपचार के संबंध में जानकारी दी । जानकारी दी गई कि, डेंगू के लक्षण अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार का होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना जो कि, आंखों को घुमाने से बढ़ता है, जी मिचलाना एवं उल्टी होना, गंभीर मामलों में नाक,मूंह, मसूड़ों में से खून आना अथवा त्वचा पर चकते उभरना होता है। डेगू फैलाने वाला मच्छर रूके हुए साफ पानी में पनपता है। जैसे की कुलर, पानी टंकी, पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, फ्रिज की टे्र, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तन व टायर आदि ।
विषय विषेषज्ञों व चिकित्सकों ने मितानिनों से कहा कि, नागरिकों से जनजागरण करते हुए कहें कि कुलर को खाली करके सूखा दें एवं पानी से भरे हुए बर्तनों एवं टंकियों आदि को ढककर रखे। ऐसा करने से डेंगू से बचाव में सहायता मिलेगी। डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है इसलिए ऐसे कपड़े पहने जो बदन को पूरी तरह ढकें, डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है, बुखार उतारने के लिए पैरासिटामल ले सकते हंै, एस्प्रीन या इबुब्रेफेन का उपयोग अपने आप ना करें, चिकित्सक की सलाह ले, डेंगू के हर रोगों को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती, डेंगू की विश्वसनीय जांच मेडिकल कालेज रायपुर में होती है।
विषय विषेषज्ञों व चिकित्सकों ने मितानिनों को बताया कि, मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो एनाफिलिज जाति के मादा मच्छर के काटने से फैलता है। इसके जीवाणु रक्त में देखे जा सकते है। मलेरिया के लक्षण ठंड के साथ बुखार आना , कपकपी बदन व सिर दर्द पसीने के साथ बुखार उतरना, बुखार का हर दूसरे या तीसरे दिन आना होता है। मलेरिया से बचाव हेतु मच्छरदानी के अंदर सोंए । बुखार आने पर रक्त की जांच करायें तथा दवाई की पूरी खुराक खाये। मच्छरजनित स्थिति को रोकने आस पास पानी जमा न होने दे। ठहरे हुए पानी में जला हुआ तेल मोबील आईल या उपलब्ध होने पर लार्वा भक्षक गंबुजिया मछली डाले। मलेरिया का अधिक खतरा गर्भवती माताओं छोटे बच्चो को रहता है अत: उन्हें सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए।
मलेरिया की जांच व उपचार सभी शासकीय अस्पतालों में नि:शुल्क होता है। चूंकि मलेरिया रोग घातक भी हो सकता है इसका सही समय पर इलाज न मिलने पर रोगी की मृत्यु भी हो सकती है अत: इसके गंभीर मरीज को तत्काल समीप के अस्पताल भेजवाना व उपचार करवाना सभी नागरिक सुनिश्चित करें। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन एवं अंत में आभार प्रदर्शन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. प्रीतम मिश्रा ने किया।

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