मड़ई-मेला भारतीय संस्कृति की पहचान : बृजमोहन

मड़ई-मेला भारतीय संस्कृति की पहचान : बृजमोहन

रायपुर : प्रदेश के कृषि सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मडई मेला हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है। गावों में यह आयोजन तब होता है जब किसान अपनी उपज को काटने के बाद थोड़ा विराम लेता है। ऐसे समय मे वह सपरिवार मडई मेला में पहुंचकर परिवार के लिए खुशियां खरीदता है। उन्होंने यह बात पुरैना में आयोजित मड़ई मेला- 2017 में उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए कही।

बृजमोहन ने कहा कि आज पुरैना गांव, गांव से शहर बनते हुए राजधानी रायपुर का हिस्सा बन गया है। परंतु यहा की संस्कृति और परंपरा आज भी अक्षुण है। गाँव मे मनाया जाने वाला हर सार्वजनिक पर्व यहा मनाया जाता है। हम देखे तो सही मायने में असली भारत जो है वह गांव में ही बसता है।

बृजमोहन ने आगे कहा की सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से हमारा छत्तीसगढ़ समृद्ध है। ऐसे में ऐतिहासिक दृष्टि से जो महत्वपूर्ण स्थान प्रदेश में है, जहां मेलों का आयोजन वर्षों से होते आ रहे हैं ऐसे स्थानों को मेरे संस्कृति मंत्री रहने के दौरान महोत्सव का स्वरुप दिया गया। जहा पर राज्य की कला-संस्कृति का बेहतर प्रदर्शन लोग देख सकते है।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्म दिवस है जिन्होंने विकास की बाट जोह रहे छत्तीसगढ़ वासियों को अलग छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात दी। आज छत्तीसगढ़ राज्य समृद्ध हो रहा है इसके सूत्रधार अटल जी ही है। इसी योगदान की वजह से वे हम छत्तीसगढ़ वासियों के हृदय में वे बसे हुए हैं।

इस अवसर पर मंचीय कार्यक्रम भारत माता की आरती के पश्चात प्रारम्भ हुआ। इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष सुभाष तिवारी,पूर्व विधायक नंदे साहू, प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के महामंत्री द्वारिकेश पांडे, भाजयुमों प्रदेश मंत्री अमित साहू, पार्षद लीलाधर चंद्राकर,बिंदु माहेश्वरी आदि उपस्थित थे।

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