लॉ छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है बीयू प्रशासन : डॉ. कल्याणी मानसिंह

एनजीओ अन्वीक्षा ने विधि छात्रों के पुर्नमूल्यांकन पर रोक लगाने पर उठाए सवाल

बिलासपुर: गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में प्रशासन की मनमानी से छात्र हितों की लगातार अनदेखी बढ़ती जा रही है। जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में घिरता जा रहा है। पिछले सप्ताह बीयू के लॉ छात्रों को पूर्व स्वीकृत पुर्नमूल्यांकन व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। जिसकी वजह से वार्षिक परीक्षाओं के कारण सेमेस्टर प्रभावित होगा। एनजीओ अन्वीक्षा की उपाध्यक्ष डॉ. कल्याणी मानसिंह महापात्र वर्मा ने बीयू विश्वविद्यालय प्रशासन पर मानमानी सवाल उठाते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय को छात्रों हितों की चिंता करनी चाहिए ताकि छात्र अपनी पढ़ाई समय पर पूरी कर सके।

बता दें कि प्रभावित विधि छात्र पहले ही एक या डेढ़ एकेडेमिक वर्ष पीछे चल रहे हैं। विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका भी लगाई गई है। बता दें कि जुलाई में बीयू ने डिटेल्स जारी किए थे। जिसमें 21000 हजार छात्रों को पुर्नमूल्यांकन के दायरे में बताया गया था। बाद में नवंबर-दिसंबर में खबर आई कि सभी 21000 छात्र पुर्नमूल्यांकन में उर्तीण हुए।

वहीं आगामी दो और चार अप्रैल तक सेमेस्टर परीक्षाएं घोषित हो जाने के बावजूद 28 मार्च 2018 तक पुर्नमूल्याकन के परिणाम नहीं आए थे। एटीकेटी सिस्टम में कितने प्रश्नपत्रों को फेल होने पर केरी किया जा सकता है यह भी स्पष्ट नहीं था।

एनजीओ अन्वीक्षा की उपाध्यक्ष डॉ. कल्याणी मानसिंह महापात्र वर्मा ने बताया कि इस मामले में जब कुलपति डॉ. जीडी शर्मा से वस्तुस्थिति की जानकारी ली गई तो देर शाम इंटरनेट पर पुर्नमूल्यांकन के परिणाम डिस्प्ले हुए। एटीकेटी पर तब भी स्थिति भ्रामक है। निर्धारित प्रश्न पत्रों में अनुर्तीण प्रश्न पत्रों का 50 प्रतिशत केरी किया जा सकता है। यूजीसी के मापदंड के अनुसार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस आॅर्डिनेन्स के अनुसार प्रक्रिया अपनाने के निर्देश विश्वविद्यालय को दिए हैं। बावजूद इसके निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

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