लोकतंत्र की ज्योति सदैव प्रज्ज्वलित रखें : राज्यपाल

रायपुर : लोग लोकतंत्र की ज्योति को सदैव प्रज्ज्वलित रखें । सोमवार को ये बातें प्रदेश के राज्यपाल बलरामदास टंडन ने मीसा बंदियों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने सम्बोधन में कही । उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की भावना जीवन के साथ शुरू होती है। सच्चे लोकतंत्र में लोगों को लिखने, बोलने की आजादी होती है। वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान 19 महीने लोगों को बोलने, लिखने की स्वतंत्रता नहीं थी। नेताओं और नागरिकों को जेलों में डाल दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि आपातकाल का विरोध सामने नहीं आए। इस दौरान लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि मुझे खुशी है कि लोकतंत्र की भावना को बचाए रखने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सम्मान समारोह में कहा कि आने वाले पीढिय़ां लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को हमेशा याद रखेंगी। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश के राज्यपाल श्री टंडन स्वयं मीसाबंदी रह चुके हैं। उन्होंने भय और आतंक के उस दौर को स्वयं देखा है। श्री टंडन स्वयं लोकतंत्र के सेनानी हैं। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के मीसाबंदियों को सम्मान निधि दे रही है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आपातकाल के उस दौर से हम सबको यह संदेश मिलता है कि अगर भविष्य में कभी ऐसा दुर्भाग्य पूर्ण दौर आए तो सब मिलकर उसका प्रखरता से प्रतिरोध करें। मुख्य वक्ता प्रभात झा ने कहा कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया जाता है, ठीक उसी तरह लोकतंत्र की रक्षा के लिए चलाए गए आंदोलन में लोकनायक स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने सहित अन्य अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक सहित अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित थे। समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानी के रूप में रजनी ताई उपासने, मणिलाल चन्द्राकर, जयंत तापस, शिरोमणि राव घोरपड़े और सुनील पुराणिक को सम्मानित किया।

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