विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर दिलाया स्थान: कौशलेन्द्र

दुर्ग: स्वामी विवेकानंद के 155 वीं जयंती के उपलक्ष्य में शैलदेवी महाविद्यालय अंडा में उनके जीवन और कार्यों पर बौद्धिक चर्चा हुई। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत के सामाजिक सदभाव प्रमुख कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन को विश्व पटल पर पुन: स्थापित किया।

मैकालियन शिक्षा पद्धति ने हमारी संस्कृति को विकृत रूप में प्रस्तुत करने का दुष्चक्र रचा था। उनका कहना था कि भारत अंधविश्वास, रूढि़वादी, पुरातनपंथी संस्कृति है। भारत छुआछूत, जातिभेद से ग्रस्त समाज है। उनके इस दुष्प्रचार को स्वामीजी ने विश्व धर्म संसद में खंडन किया और भारत के वसुधैव कुटुंबकम तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग भिन्न भिन्न हो सकता है।

अंत में मोक्ष कि प्राप्ति होती है जबकि उस संसद में आए अन्य सभी मत पंथ के विचारक ईश्वर तक उनके ही सम्प्रदाय के माध्यम से पहुँचा जा सकता है ,जबकि भारतीय दर्शन में सभी प्राणियों में परमात्मा का दर्शन की बात कही है। 

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता दुष्यंत साहू ने किया। अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य सत्येंद्र तिवारी ने किया।

इस में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सम्पर्क प्रमुख ज्ञानसिंह राजपूत, दुर्ग खंड सम्पर्क प्रमुख दीपक चंद्राकर, स्वदेशी जागरण मंच भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ललित चंद्राकर, महाविद्यालय के प्राध्यापक नरेश देशमुख, रुपेंद्र वर्मा, विजय, रंजना, मनीषा वर्मा आदि उपस्थित थे। 

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