छत्तीसगढ़

श्रीराम ने संसार के प्राणियों को शिक्षा देने के लिए केवट से नाव लाने के लिए कहा : सदानंद सरस्वती

रामकथा का चौथा दिन

ज्योतिष व द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानंद जी सरस्वती महाराज ने बेमेतरा जिले के खैरझीटीकला गांव में रविशंकर पटेल के द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राम कथा के चौथे दिन रामकथा की शुरुवात एक श्लोक से किया – ” मांगी नाव ना केवट आना ।  कहुँ तुम्हार मर्म मे  जाना ।”

इसका तात्पर्य यह है कि प्रभु के चरणों से  गंगा का अवतरण हुआ है वही प्रभु आज नर लीला करते हुए गंगा से पार होने के लिए केवट से नाव मांग रहे हैं । जो प्रभु संसार में पड़े हुए प्राणियों को भवसागर से तार देते हैं वही प्रभु संसार के प्राणियों को शिक्षा देने के लिए केवट से नाव लाने को कहते हैं।।

महाराज दशरथ श्रीराम का राज्य अभिषेक करना चाहते थे ।

कैकई ने वरदान मांग कर उन्हें बनवास दिलवा दिया, देवों का कार्य सिद्ध करने के लिए यही भवितव्यता थी। आज की कथा का रहस्य बताते हुए स्वामी जी ने कहा की जीवात्मा दशरथ ज्ञान राम को मोक्ष पद राज्य देना चाहते थे, परंतु प्रवृत्ति रूपी कैकई ने ममता दासी मंथरा की बातों में आकर ज्ञान राम को  भवाटवी वन  भेज दिया ।

उसके साथ शांति सीता और विवेक लक्ष्मण वन को चले गए।

 जीवात्मा दशरथ ने अपने मंत्री सतोगुण सुमंत्र को आज्ञा दी कि शांति रूपी सीता सहित दोनों कुमारो  को वन दिखा  कर चारों अवस्था रूप चार दिन में वापस लौट आना । सतोगुण सुमंत्र ने शांति सीता विवेक लक्ष्मण और ज्ञान रूपी राम को धैर्य रथ पर बिठा लिया ।

जिसके शम ,दम  दो चक्के और नियम, संयम  दो घोड़े थे। मुमुछु निषादराज के मिल जाने पर ज्ञानरूपी राम ने सतोगुण सुमंत्र को रथ सहित  वापस कर दिया और आप इडा पिंगला गंगा यमुना के संगम रूप सुषुम्ना त्रिवेणी में स्नान कर गंगा पार हो गए। रास्ते में संतोष तपस्वी के मिलने में मुमुछु  निषाद को वापस कर दिया और समाधान भरद्वाज ऋषि और समस्तभाव रुपी  याज्ञवल्क्य आदि ऋषियों के दर्शन करते हुए सुस्थिर  चित्त रूप चित्रकूट  में जाकर ढृढतारूप पर्णकुटी  में रहने लगे। यह आयोजन खैरझीटीकला गांव के रविशंकर पटेल ने किया जिसमें 500 से अधिक भक्तों ने स्वामी जी द्वारा रामकथा का रस पान करवाया।

शंकराचार्य आश्रम रायपुर के प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी (रिद्धीपद) ने उक्त विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि आज के चौथे दिन के कथा में विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के सभी शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद महाराज, सलधा धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, परमहंसी गंगा आश्रम के ब्रह्मचारी धरानंद महाराज, रायपुर स्थित शंकराचार्य मठ के पुरोहित राम कुमार शर्मा , रत्नेश शुक्ला अन्य पूज्य संत महात्मा उपस्थित थे। शंकराचार्य आश्रम रायपुर के प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी (रिद्धीपद) ने सभी भक्तों से आग्रह किया कि 9 मार्च 2018 को रामकथा के अंतिम दिन सभी श्रद्धालुगण अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा का रस पान करें और पूज्य स्वामी सदानंद सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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