समय पर काम, नहीं तो प्रमोटर को देना होगा बैंक दर से 2 फीसदी ज्यादा ब्याज : ढांड

रायपुर: राज्य में रेरा लागू होने के बाद से समय पर काम पूरा नहीं होने वाले प्रमोटर को बैंक दर से 2 प्रतिशत ज्यादा ब्याज देना होगा। सोमवार को ये बातें छतीसगढ़ भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष विवेक ढांड ने कही ।

उन्होंने आगे कहा कि,प्रमोटर को किसी भी प्रोजेक्ट को शुरु करने से पहले प्रोजेक्ट की लागत का 70 प्रतिशत मूल्य रेरा की निगरानी में दूसरे बैंक खाता में जमा करना होगा, जिसे तीन सदस्यीय कमेटी सिविल इंजीनियर, आर्किटेक और चार्टड एकाउंटेंट के प्रमाणिकरण के बाद जितना प्रतिशत काम पूर्ण होगा उस रेशो में बैंक से पैसे का आहरण कर सकेंगे। 

रेरा में प्रमोटर्स का पंजीयन 15 से : 

ढांड ने कहा कि, प्रापर्टी बेचते वक्त अनुबंध भी रेरा के निर्धारित प्रारुप में किया जाएगा। ऐसे प्रोजेक्ट जिनका रेरा के पंजीयन से पहले अनुबंध हुआ है वे स्वत: निरस्त हो जाएंगे। उनके स्थान पर रेरा के नियम लागू हो जाएंगे। रेरा में प्रमोटर्स का पंजीयन लगभग 15 फरवरी से शुरु होगा। रेरा में पंजीयन के लिए प्रमोटर्स को ऑनलाइन आवेदन करना होगा । रेरा में आवेदन करने की प्रक्रिया तकनीकी कारणों से टिपीकल है। इसलिए प्रमोटर्स को आवेदन का मूल स्वरुप भी जमा करना होगा। 

 रेरा को सिविल कोर्ट का अधिकार : 

उन्होंने कहा कि, रेरा में 500 वर्ग मीटर से 8 मकान, दुकान, गोडाउन आदि प्रमोटर्स को पंजीयन कराना आवश्यक है। ऐसे कोई भी प्रमोटर्स जो रेरा में पंजीयन के बगैर कार्य या विज्ञापन करेगा तो उसे भारी जुर्माना और सजा का भी प्रावधान है। रेरा को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं, जिससे किसी भी शिकायतों का निराकरण तय समयावधि में हो सके। 

रेरा में पंजीयन के लिए शुल्क 25 हजार रुपए से 10 लाख रुपए तक नियत किया गया है। ढांड ने कहा कि, पूर्ण दस्तावेज मिलने के 30 दिनों के भीतर प्रमोटर्स को पंजीयन क्रमांक जारी कर दिया जाएगा।

साथ ही उन्हें रेरा की वेब साइट पर भी विज्ञापन व अपनी सुविधाओं के प्रचार-प्रसार के लिए एक पेज भी उपलब्ध कराया जाएगा। रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट्स के प्रगति की तिमाही स्थित अद्यतन करना होगा। कोई भी प्रमोटर्स उपभोक्ता से एग्रीमेन्ट के साथ 10 प्रतिशत राशि ही बतौर अग्रिम भुगतान प्राप्त कर सकेगा। 

 क्या है भवनों की सुरक्षा ; 

ढांड ने कहा कि, किसी भी प्रमोटर्स से खरीदा गया या निर्मित कराया गया मकान यदि पांच वर्षों के भीतर स्ट्रक्चरल डेमेज होता है, तो उसे सुधरवाकर देने की जिम्मेदारी प्रमोटर्स की होगी। यदि कोई प्रमोटर्स नियमों का पालन नहीं करेगा, तो उसे जुर्माना अथवा करावास दोनों की सजा देने का प्रावधान है। 

ढांड ने जानकारी दी कि, प्रमोटर्स के साथ काम करने वाले उनके एजेन्टों का पंजीयन कराना भी अनिवार्य है। व्यक्ति को 10 हजार और संस्था को 50 हजार रुपए तक पंजीयन शुल्क पटाना होगा। जो पांच वर्ष के लिए वैद्य होगा। उसके बाद नवीनीरिण की सुविधा रहेगी। ढांड ने कहा कि, इस संबंध में अपीलीय प्रावधान जल्द ही बनाया जाएगा।

1
Back to top button