सिंधू और सायना की छाया से बाहर निकले पुरुष खिलाड़ी

नई दिल्ली: भारतीय पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी आखिरकार पी वी सिंधू और सायना नेहवाल जैसी स्टार खिलाडिय़ों की छाया से बाहर निकल आये हैं और उन्होंने अपने लिए एक अलग मुकाम बना लिया है। भारतीय बैडमिंटन लम्बे समय तक सायना के जादू से सम्मोहित रहा था और उनके आगे बाकी सभी खिलाड़ी कहीं पीछे रह जाते थे। सायना के इस एकाधिकार को सिंधू ने रियो ओलम्पिक के अपने रजत पदक से तोड़ा।

सिंधू के रजत पदक ने उन्हें निर्विवाद रूप से भारतीय बैडमिंटन की क्वीन बना दिया। अब तक जो स्थान सायना को हासिल था उस स्थान पर सिंधू विराजमान हो गयीं। सिंधू के तेज के आगे सायना ही नहीं पुरुष खिलाड़ी भी कहीं पीछे छूट गए। इन दो महिला खिलाडिय़ों के दबदबे को पहले बी साई प्रणीत ने सिंगापुर ओपन का खिताब जीतकर तोड़ा और फिर किदाम्बी श्रीकांत ने इंडोनेशिया ओपन तथा ऑस्ट्रेलियन ओपन के रूप में लगातार दो सुपर सीरीज खिताब जीतकर सिंधू और सायना के भारतीय बैडमिंटन पर एकाधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

अब भारतीय बैडमिंटन में अगर बात हो रही है तो सिर्फ श्रीकांत की जिन्होंने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी, ओलम्पिक चैंपियन और विश्व चैंपियन खिलाडिय़ों को एक के बाद एक हराया है। यह ऐसी उपलब्धि है जो अब तक किसी भारतीय खिलाड़ी को हासिल नहीं थी।

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