क्राइम

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने वाले 10 गिरफ्तार, UP एटीएस की कार्रवाई

युपी एटीएस ने आतंकी संगठनों को पैसे मुहैया कराने वाले 10 स्थानीय मददगारों को किया गिरफ्तार. जिन लोगो की गिरफ्तारी हुई उनमे से दो गोरखपुर के नईम अरशद और नसीम अहमद हैं, वहीं दो प्रतापगढ़ के नीरज मिश्रा और संजय सरोज, एक लखनऊ का साहिल मसीह, कुशीनगर का निखिल राय, आजमगढ़ का अंकुर राय और मध्यप्रदेश के रीवा का उमा प्रताप सिंह व बिहार के गोपालगंज का मुकेश प्रसाद शामिल है.

उत्तर प्रदेश: युपी एटीएस ने आतंकी संगठनों को पैसे मुहैया कराने वाले 10 स्थानीय मददगारों को किया गिरफ्तार. जिन लोगो की गिरफ्तारी हुई उनमे से दो गोरखपुर के नईम अरशद और नसीम अहमद हैं, वहीं दो प्रतापगढ़ के नीरज मिश्रा और संजय सरोज, एक लखनऊ का साहिल मसीह, कुशीनगर का निखिल राय, आजमगढ़ का अंकुर राय और मध्यप्रदेश के रीवा का उमा प्रताप सिंह व बिहार के गोपालगंज का मुकेश प्रसाद शामिल है.

एटीएस यह भी बताया कि निखिल राय का असली नाम मुशर्रफ अंसारी है. लेकिन इसके सभी साथी इसे निखिल के नाम से ही जानते थे. एटीएस के अनुसार अभी और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. एटीएस ने इन सभी आरोपियों के पास से करीब 42 लाख रुपए नकद और फर्ज़ी दस्तावेज बरामद किए हैं यूपी एटीएस के मुताबिक यह सभी स्थानीय लोग थे.

यह सभी आतंकी संगठनों तक पैसा मुहैया कराने वाले एक नेटवर्क से जुड़े थे. जो पाकिस्तान से संचालित हो रहा था. यूपी एटीएस की जांच में पता चला है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का एक शख्स इंटरनेट के जरिए इस नेटवर्क के सदस्यों से संपर्क में रहता है. और इसी के आदेश पर यह लोग फर्जी नाम से बैंक एकाउंट खोलते थे. उसी के निर्देश पर खातों में पैसे ट्रांसफर करते थे. इसमें इन एजेंटों को कुछ प्रतिशत का कमीशन मिलता था.

इससे पहले 2016 में ISI एजेंट तरसेम लाल और सेना की गुप्त सूचना पाकिस्तान को देने वाले सतविंदर और दादू जम्मू में गिरफ्तार किए गए थे. इन सभी की आर्थिक मदद मध्यप्रदेश का बलराम करता था, जिसे पिछले ही साल ही गिरफ्तार लिया गया था. इन दोनों प्रकरण में पाकिस्तानी हैंडलर वही था जो यहां प्रतापगढ़ के संजय सरोज और रीवा का उमा प्रताप सिंह के संपर्क में था.

Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.