100 साल पुराना है अष्टमुखी शिव मंदिर जानिए इतिहास

भरत सिंह :

बिलासपुर : भगवान शंकर की कृपा शहरवासियों पर सालों से बनी हुई है और इसका सबसे अच्छा उदाहरण मध्य नगरी चौक स्थित अष्टमुखी शिव मंदिर है। मंदिर लगभग सौ साल पुराना है।

इसे पंचायती शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना बहुत छोटे रूप में हुई थी, जिसे धीरे.धीरे भव्य रूप प्रदान किया गया। अब शहर की पहचान बन गया है।

अष्टमुखी पंचायती शिवर मंदिर में भगवान शंकर की छोटी शिवलिंग स्थापित थी। मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और उसके परिणाम स्वरूप मंदिर में लगभग 20 साल पहले अष्टमुखी शिव की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई।

मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापित होने के बाद यहां पर इस अनोखी प्रतिमा को देखने के लिए शहर के अलावा प्रदेशभर से लोग पूजन व दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर में शिव भक्त सालभर पूजन के लिए आते हैं।

महाशिवरात्रि व सावन में तो मंदिर में विशेष पूजा होती है। चैतुरगढ़ से लाई गई थी प्रतिमा भगवान शंकर की अष्टमुखी प्रतिमा चैतुरगढ़ से लाई गई थी। 10 फीट ऊंची शिवलिंग में भगवान के आठ मुख खास हैं।

भगवान शिव के आठ मुख को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। जल अर्पित करने के लिए भक्त परिवार के साथ पहुंचते हैं। लड्डुओं व खीर का चढ़ता है भोग महाशिवरात्रि पर मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने मिलता है।

मध्यरात्रि से भगवान का रुद्राभिषेक किया जाता है। इसके बाद दिन भर सूक्ष्म रुद्राभिषेक का कार्यक्रम होता रहता है। भगवान को लड्डुओं व खीर का भोग अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही ठंडाई का प्रसाद भी वितरित किया जाता है।

2010 में हुआ नवीनीकरण मंदिर स्थल पर सालों पहले पंचायत की बैठक हुआ करती थी। यहां पर भगवान शंकर का छोटी सा मंदिर बनवाया गया था। पंचायत व्यवस्था खत्म होने के बाद भी स्थानीय लोगों ने मंदिर को भव्य रूप प्रदान कियाए तब से इसकी देखभाल मंदिर समिति कर रही है.

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