20 थानों में 1009 आपराधिक मामले लंबित, पुलिस के छूटे पसीने

अंकित मिंज:

बिलासपुर: जिले के लंबित अपराधों में एक तिहाई से अधिक मामले शहर के दो थानों में लंबित हैं। वहीं 344 मामले ऐसे हैं जिनमें पुलिस साल भर में जांच करने के बाद भी कोर्ट में चालान पेश नहीं कर पाई है।

आपराधिक मामलों की जांच करने में पुलिस के पसीने छूट गए है। पिछले साल के ही कुल 1009 संगीन मामले 20 थानों में लंबित हैं। इनमें से 210 प्रकरण सिविल लाइन और 144 मामले सरकंडा थाने में लंबित हैं।

एफआईआर दर्ज करने से कतराने वाली पुलिस थानों में दर्ज अपराधों की जांच करने में भी कोताही बरतने लगी है। यही कारण है कि जिले के 20 थानों में 2018 में दर्ज हुए आपराधिक प्रकरणों की जांच साल खत्म होने पर भी नहीं हो पाई है। वर्तमान में दर्ज होने वाले मामलों के साथ पुलिस को बीते वर्ष के लंबित आपराधिक मामलों की भी जांच करनी पड़ेगी।

चोरी के आधे से अधिक मामलों का खात्मा

जिले के 20 थानों में वर्ष 2018 में कुल 9944 अपराध दर्ज हुए हैं। इनमें से 6 हजार से अधिक मामले संपत्ति संबंधी अपराधों के थे। अधिकांश संपत्ति संबंधी मामले चोरी से संबंधित थे, जिसमें बाइक और सूने मकानों से चोरी के मामले अधिक थे। इन मामलों की जांच करने के बाद पुलिस ने करीब 5000 से अधिक मामलों का खात्मा कर दिया है।

बीते वर्ष की तुलना में अपराध व पेंडेंसी बढ़ी

वर्ष 2017 में जिले के 20 थानों में कुल पौने 9 हजार अपराध दर्ज हुए थे, जबकि पेंडेंसी 600 के लगभग थी, लेकिन वर्ष 2018 में अपराध का आंकड़ा करीब 10 हजार पहुंच गया और लंबित अपराध का आंकड़ा 1 हजार से पार हो गया है। बीते वर्ष की तुलना में दर्ज अपराध और लंबित अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

नए विवेचकों के लिए अधूरे प्रकरण सिरदर्द

विधानसभा आचार संहिता लगने से पहले जिले के थानों में पदस्थ 90 फीसदी पुलिस कर्मियों को दूसरे जिलों में तबादला हुआ था, जिससे अधिकांश मामलों की जांच अधूरी रह गई थी।

चुनाव ड्यूटी लगने के कारण अधिकांश मामले लंबित हो गए थे। अब थानों में पदस्थ हुए नए विवेचकों के लिए यहीं मामले सिरदर्द साबित हो रहे हैं। नए विवेचकों को न ही प्रकरण की जानकारी है और न क्षेत्र की। ऐसे में वर्ष 2018 के लंबित मामलों का निराकरण करने में पुलिस को 6 महीने से अधिक का समय लग जाएगा।

344 चालान लंबित

जिले के 20 थानों में 344 संगीन मामले ऐसे हैं जिनमें पुलिस कर्मियों ने सालभर जांच की है। इन मामलों में पुलिस अपराधियों को पकड़े में सफल नहीं हुई। 31 दिसंबर 2018 तक इन मामलों में चालान कोर्ट में पेश नहीं हो पाए थे। लंबित अपराधों की तहर पुलिस को वर्ष 2019 से लंबित संगीन मामलों का चालान तैयार करना पड़ेगा।

1
Back to top button