भारतीय मूल के 12 साल के अभिमन्यु बने दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर

अप्रैल 2021 में अभिमन्यु ने अपना पहला GM नॉर्म हासिल किया।

दिल्ली: भारतीय मूल के 12 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी अभिमन्यु मिश्रा दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। न्यू जर्सी में रहने वाले अभिमन्यु (12 साल, 4 माह, 25 दिन) ने रूस के सर्गेई कर्जाकिन (12 साल, सात माह, 2002) का 19 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर यह उपलब्धि हासिल की। अभिमन्यु ने बुडापेस्ट में अपना तीसरा जीएम मानक हासिल किया, जिसके चलते उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। उनकी इस उपलब्धि पर Chess.com ने अपनी आधिकारिक रिलीज में लिखा, ‘बुधवार को मिश्रा ने अपने छोटे लेकिन मधुर करियर का अब तक का सबसे बड़ा मैच जीत लिया है। उन्होंने 15 वर्षीय भारतीय जीएम लियोन ल्यूक मेंडोंका को हराया, इस दौरान उन्होंने नौ राउंड में 2600 से अधिक रेटिंग हासिल की।’

अभिमन्यु ने जीएम सर्गेई कारजाकिन का 19 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। 12 अगस्त 2002 को, 2016 में विश्व चैंपियनशिप चैलेंजर, कारजाकिन ने 12 साल और सात महीने की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था। वहीं अभिमन्यु को शतरंज में सर्वोच्च खिताब हासिल करने में 12 साल, चार महीने और 25 दिन लगे। ग्रैंडमास्टर बनने के लिए 100 ELO पॉइंट और 3 GM नॉर्म्स की जरूरत होती है। अप्रैल 2021 में अभिमन्यु ने अपना पहला GM नॉर्म हासिल किया। मई में दूसरा GM नॉर्म हासिल किया था और, अब वो तीसरा GM नॉर्म भी हासिल कर ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं।

मिश्रा ने कई महीने बुडापेस्ट, हंगरी में एक के बाद एक टूर्नामेंट खेलते हुए, खिताब और रिकॉर्ड का पीछा करते हुए समय व्यतीत किया। उन्होंने अप्रैल में आयोजित वेजेरकेपजो टूर्नामेंट में और मई 2021 के पहले शनिवार टूर्नामेंट में अपने दोनों जीएम मानकों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके अलावा उन्होंने विशेष रूप से स्कोरिंग मानकों के लिए स्थापित 10 खिलाड़ियों के दोनों राउंड-रॉबिन मैचों में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।

बेटे की उपलब्धि से पूरा परिवार खुश

इस उपलब्धि के बाद अभिमन्यु के पिता हेमंत ने एक इंटरव्यू में कहा कि हम जानते थे कि यूरोप में टूर्नामेंट में हमारे लिए बड़ा मौका था। हमारे पास एकतरफा ही टिकट थे और एक के बाद एक टूर्नामेंट खेलने के लिए अप्रैल के पहले सप्ताह में बुडापेस्ट पहुंचे। यह एक सपना था जिसे मैंने, मेरी पत्नी स्वाति और अभिमन्यु ने साझा किया और इस भावना को व्यक्त करने के लिए कोई शब्द नहीं हैं।

अभिमन्यु की इस उपलब्धि पर भारत में अमेरिका उच्चायोग ने इसकी प्रशंसा की है। इसके अलावा भारतीय शतरंज एसोसिएशन और वर्ल्ड शतरंज एसोसिएशन ने भी इनकी तारीफ की है।

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