भिलाई में डेंगू से 12वीं मौत, 13 साल के मासूम की मौत

- 22 वार्ड चपेट में, शहर के अलग-अलग अस्पतालों में डेंगू के चौदह सौ मरीज

भिलाई.

डेंगू के डंक ने एक और जिंदगी लील ली। रविवार को 13 साल के मासूम मुकेश कुमार की डेंगू से मौत हो गई। इसके साथ ही शहर में डेंगू से मरने वालों की संख्या 12 पहुंच गई। मुकेश का उपचार शहर के एक निजी अस्पताल में बीते चार दिनों से चल रहा था। जानकारी के अनुसार बीती रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। अल सुबह मासूम ने अंतिम सांस ली। इधर शहर के अलग-अलग अस्पतालों में लगभग चौदह सौ डेंगू मरीजों का उपचार चल रहा है। भिलाई क्षेत्र में डेंगू एक के बाद एक पैर पसार रहा है। अब तक शहर के 22 वार्डों में डेंगू फैल गया है। जिसकी वजह से हजारों लोग इसकी चपेट में आ गए हैं।

-मैलाथियान से नहीं मर रहे एडीज मच्छर

डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर को मारने के लिए मैलाथियान कारगर नहीं हो रही है। निगम मैलाथियान का छिड़काव कर रही थी। उसके जगह पर हाई पॉवर टैमीफॉक्स का छिड़काव किया जाएगा। कलेक्टर ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा शासन से दवाई निगम और बीएसपी को उपलब्ध कराई है। नए सिरे से वार्डों में दवा छिड़काव होगा। इधर, डेंगू की प्रारंभिक जांच में ११ हजार रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल हो चुका है। अब किट का अभाव होने लगा है।

-5000 हजार किट की डिमांड

जिला मलेरिया विभाग ने सीजीएमएससी से 5000 हजार किट का डिमांड भेजा है, लेकिन डिपो ने शनिवार को केवल 1000 किट उपलब्ध करा पाया है। डिपो प्रभारी महिमा दुबे ने बताया कि किट की कमी नहीं होगी। कांकेर से 2000 और महासमुंद से 3000 किट मंगाई जा रही है। भिलाई के 22 वार्ड डेंगू से प्रभावित हो चुके हैं। नगर निगम की सामान्य सभा में प्रभावित वार्डों की संख्या स्वीकार की गई। जिला अस्पताल में शुक्रवार की तुलना में दस मरीज अधिक भर्ती हुए। इसमें से 20 डेंगू के सभावित मरीज में बच्चे है। जिन्हें चाइल्ड वार्ड में रखा गया है।

-अस्पताल से बिना जांच लौटाए जा रहे मरीज

जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में 300 किट हैं। यहां अभी रोज 40 किट इस्तेमाल हो रही है। अब तक यहां 450 मरीजों की जांच की गई है। इसकी वजह यह है कि यहां अब भी बुखार को वायरल माना जा रहा है। साफ तौर पर लक्षण दिखने पर ही रैपिड टेस्ट किट से जांच की जा रही है जबकि स्पष्ट आदेश हैं कि सभी बुखार के मरीजों की डेंगू जांच की जाना है।

-सीएस के आदेश के बाद भी नहीं आए स्वास्थ्य संचालक

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य संचालक को दो दिन में डेंगू की रोकथाम की प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा था। इसके लिए उन्हें भिलाई में रहने को कहा गया था। शुक्रवार को वे वापस रायपुर चले गए थे। शनिवार को उन्हें सुबह भिलाई पहुंचना था। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनका इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए।

अस्पतालों ने नहीं की डिमांड, 5 यूनिट प्लेटलेट्स फेंकना पड़ा

निजी अस्पताल प्लेटलेट्स की डिमांड नहीं भेज रहे हैं जबकि उनके यहां भर्ती मरीज परेशान हो रहे हैं। नर्सिंग होम में भर्ती संजय मिश्रा की प्लेटलेट्स कम हो रही थी तब भी डिमांड लेटर नहीं भेजा गया। आखिर में सेक्टर-9 अस्पताल से प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई गई। ब्लड बैंक को डिमांड नहीं मिलने से जो प्लेटलेट्स निकालकर रखी गई थी उसमें से 5 यूनिट फेंकना पड़ी।

-सुपेला अस्पताल में पांच मरीज गंभीर

लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में अब तक 192 डेंगू के पॉजिटिव मरीज मिले हैं। एचएससीएल कॉलोनी सेक्टर ६ निवासी चंचल, खुर्सीपार की यामिनी, शास्त्री नगर कैंप-1 के योगेश्वर साहू, कैंप-2 के विशाल दास और सुपेला कंट्रेक्टर कॉलोनी निवासी पूजा की स्थिति गंभीर है। उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

-छावनी पीएचसी : किट खत्म हो गई

तीन दिनों में 93 लोगों के सैंपल लिए गए, जिनमें से 28 पॉजिटिव आए। शनिवार को ही १५ डेंगू प्रभावित सामने आए। इनमें अधिकांश बच्चे हैं। सभी को जिला अस्पताल रेफर किया गया। टेस्ट किट खत्म हो गई। यहां 200 किट और उपलब्ध कराई गई। यहां निरीक्षण करने कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय और सीएचएमओ डॉ. सुभाष पांडेय भी पहुंचे।

-बैकुंठधाम पीएचसी : 21 मरीज मिलेतीन

दिनों में डेंगू प्रभावित 46 मरीज मिले जिनको जिला अस्पताल रेफर किया गया। शादरा पारा, किशन चौक, संतोषी पारा, संज्ञाम चौक के सबसे अधिक मरीज सामने आए। शनिवार को टेस्ट किट से 82 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 21 पॉजीटिव मिले। यहां एकाएक भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों को सुपेला या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ा।

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