फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी कर रहे 13 शिक्षाकर्मी होंगे बर्खास्त

दीपक वर्मा अभनपुर:

अभनपुर: अभनपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत भर्ती हुए शिक्षाकर्मी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षाकर्मी वर्ग 03 की नौकरी प्राप्त कर अभनपुर क्षेत्र की विभिन्न शालाओं में पिछले 13-14 वर्षों से अध्यापन करा रहे 13 शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया जा रहा है। जनपद पंचायत द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है और संभव है कि सोमवार को इन शिक्षाकर्मियों को बर्खास्तगी आदेश जारी हो जाए।

मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर रायपुर को इस संबंध में शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिस पर कलेक्टर के आदेश पर जिला पंचायत रायपुर व विकासखंड शिक्षाधिकारी कार्यालय अभनपुर द्वारा संबंधित शिक्षाकर्मियों के फर्जी बताये जा रहे प्रमाण पत्रों की जांच करवाई गई।

जनपद पंचायत को रिपोर्ट सौंपी गई प्रमाण पत्र

जांच में प्रमाण पत्र वास्तव में फर्जी मिले, इसके बाद जनपद पंचायत को रिपोर्ट सौंपी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर जनपद पंचायत की सामान्य सभा बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। इतना ही नहीं इन शिक्षाकर्मियों के नियुक्ति के दौरान प्रमाण पत्रों की जांच/सत्यापन हेतु गठित किए गए चयन समिति के सदस्यों से शिक्षाकर्मियों की उनके नियुक्ति दिनांक से बर्खास्तगी दिनांक तक किये गए वेतन भुगतान की राशि वसूल करने भी निर्देशित किया गया है।

हालांकि अभी अधिकृत तौर पर बर्खास्तगी आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सोमवार को आदेश जारी होने की बात जनपद के प्रभारी सीईओ केके सेन द्वारा कही गई है। बर्खास्त होने वाले शिक्षाकर्मी-जिन शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया जा रहा है, उनमें तारण डहरिया (प्रा. शा.), ” साहु ( 7 सिवनी ), सुषमा सोनी (प्रा. शा. बेलर मिश्वर ),

शिखा साहू( प्रा. शा. कुरी ), बिंदूलता साहू(प्रा. शा. किरवई), चम्पा ध्रुव(प्रा. शा. बेन्द्री) , यशवंत गायकवाड़(प्रा. शा. पूर्व मा. शा. सिवनी), केशव कोसले( प्रा. शा. परसल्ले) दिनेश साहू( प्रा. शा ढोढरा ), वंदना साहू (कन्या. शा. रवेली), बिन्दावती ध्रुव (प्रा. शा. पलौद ), गोमती साहू( प्रा. शा. सदा ), डेमिन साहू(प्रा. शा. गदहीडीह फिसोश्वर), गोदावरी साहू(प्रा. शा. बेलर) शामिल हैं।

इनमें से तारण डहरिया व केशव कोसले पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर में चयनित होने के कारण जबकि गोदावरी साहू निजी कारणों से पहले ही इस्तीफ दे चुके हैं। एफआईआर व जिम्मेदार समिति सदस्यों पर कार्यवाही नहीं?

शासन के साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में प्रस्ताव

बता दें कि फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी प्राप्त करना पारित किया प्रस्ताव शासन के साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। इतना है नहीं शिक्षाकर्मियों के इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन प्रमाण पत्र सत्यापन समिति सदस्यों की बराबर भूमिका है, जिन्होंने जान-बूझकर फर्जी प्रमाण पत्रों को सही बताकर नौकरी हासिल करने में संबंधित शिक्षाकर्मियों की मदद की।

उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद भी 420 के तहत् कार्यवाही

लेकिन न तो शिक्षाकर्मियों और न ही सत्यापन समिति सदस्यों के विरूद्ध एफआईआर पर कोई निर्णय लिया गया है। प्रभारी सीईओ सेन का कहना है कि उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद भी 420 के तहत् कार्यवाही होगी।

इस्तीफा देने वाले भी दोषी

बर्खास्त किए गए 13 शिक्षाकर्मियों में से 3 पहले ही विभिन्न कारणों से अपने पद से इस्तीफ दे चुके हैं। लेकिन उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर कई वर्षों तक शिक्षाकर्मी के पद पर नौकरी की है और वेतन सहित अन्य सुविधाओं का लाभ लिया है। ऐसे में इस्तीफ देने के बाद भी वे दोषी ही कहलाएंगे। देखना यह होगा कि सब-इंस्पेक्टर बन चुके दो दोषी शिक्षाकर्मियों तारण डहरिया व केशव कोसले के विरूद्ध क्या पुलिस विभाग कार्यवाही करते हुए बर्खास्त करता है?

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