13 मंत्री, 20 दावेदार, भूपेश बघेल के सामने चुनौती

-राहुल दरबार में रायशुमारी के बाद कैबिनेट को दिया जाएगा अंतिम स्वरूप

प्रदीप शर्मा

रायपुर:

छत्तीसगढ़ में पंद्रह साल बाद कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली है, कांग्रेस को मिली बंपर जीत के बाद भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की कमान थाम ​ली है। इसके साथ ही अंबिकापुर विधायक टीएस सिंहदेव और दुर्ग से जीत कर विधानसभा में पहुंचे ताम्रध्वज साहू ने भी पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में मंत्री पद की शपथ ली।

शपथ ग्रहण समारोह में राहुल ने तीनों नेताओं से हाथ उठावाकर एकजुटता का संदेश भी कांग्रेस जनों और जनता को दिया। बावजूद इसके कांग्रेस के सामने कैबिनेट गठन की बड़ी चुनौती मौजूद है।

बता दें कि इस बार कांग्रेस विधानसभा की कुल 68 सीटों पर जीत हासिल की है, जिनमें कई विधायक तीसरी.चौथीबार जीत कर विधानसभा में पहुंचे हैं, जो मंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार हैं।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में 90 सीट शामिल है, लेकिन संवैधानिक बाध्यता के चलते इनमें से 13 मंत्री ही बनाए जाएंगे, जबकि दावेदारों की संख्या लगभग 20 है।
यहीं वजह है कि मुख्यमंत्री समेत दो मंत्रियों के शपथ लेने के बाद कैबिनेट गठन का मामला अगले दौर के लिए टाल दिया गया है। क्लिपर28 को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस आला कमान इस चुनौती से निपटने के लिए एक रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत क्षेत्र, जाति व वर्ग का भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ये भी हैं मंत्री पद के दावेदार

0.चरणदास महंत
पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रशासनिक अनुभव है, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी रहे। एमपी में गृहमंत्री का अनुभव है। दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में महंत गृह, जनसंपर्क जैसे मंत्रालय संभाल चुके हैं।

0.सत्यनारायण शर्मा
क्यों: कांग्रेस के सबसे अनुभवी विधायकों में से एक हैं। दिग्विजय सिंह और अजीत जोगी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

0.रविंद्र चौबे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। जनसंपर्क, पीडब्लूडी विभागों के कामकाज का अच्छा अनुभव रहा है।

0.धनेन्द्र साहू
अजीत जोगी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं, पीसीसी अध्यक्ष भी रहे। प्रदेश में सियासी तौर पर शक्तिशाली माने जाने वाले साहू समाज से जनप्रतिनिधि हैं।

0.शिव डहरिया
क्यों: सतनामी समाज से अनुभवी विधायक हैं।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, इसलिए दावेदारी प्रमुख मानी जा रही है।

0.अमरजीत भगत
तेजतर्रार आदिवासी नेता हैं, सरगुजा संभाग में 14 में से सभी 14 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है. ऐसे में इनको मंत्री बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है।

0.खेलसाय सिंह
अनुभवी विधायक खेलसाय सिंह सरगुजा सांसद सहित मध्यप्रदेश में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

0.उमेश पटेल
क्यों: युवा चेहरा हैं. स्व. नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। हाईप्रोफाइल प्रत्याशी ओपी चौधरी को पराजित कर लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं।

0.प्रेमसाय टेकाम
जोगी सरकार में कृषि मंत्री रहे हैं 6 बार के विधायक हैं। सरगुजा में सक्रिय विधायक और आदिवासी समाज में पकड़ है। सरगुजा राजपरिवार के करीबी विधायकों में गिने जाते हैैं।

0.अनिला भेड़िया
क्यों: लगातार दूसरी बार जीतीं. आदिवासी समाज से आती हैं। मंत्री पद के लिए प्रबल दावेदारी है।

0.कवासी लखमा
कवासी लखमा लगातार चौथी बार विधायक बनकर आए हैं। बस्तर के घोर नक्सल प्रभावित इलाके से आते हैं। सदन में आक्रामक नेता की छवि है।

0.अरुण वोरा
दुर्ग शहर से चुनाव जीतकर आए अरुण वोरा भी तजुर्बेकार विधायक हैं। हाईकमान के सबसे करीबी राष्ट्रीय महामंत्री प्रशासन मोतीलाल वोरा के बेटे हैं।

0.अमितेष शुक्ल
अनुभवी नेता हैं, जोगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। शुक्ल परिवार के सदस्य, इस बार 58 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीते, पार्टी आलाकमान से बेहतर संबंध हैं।

0.मोहम्मद अकबर
पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा व अनुभवी विधायक हैं, डॉ. रमन सिंह के गृहनगर यानी कवर्धा से सर्वाधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया। इनकी दावेदारी भी मजबूत है।

0.विकास उपाध्याय
प्रदेश के कद्दावर मंत्री राजेश मूणत को हराकर चुनाव जीता। युवा चेहरा होने के साथ ही संगठन में सक्रिय रहे हैं।

0.देवेन्द्र यादव
प्रदेश के कद्दावर नेता प्रेमप्रकाश पांडेय को हराया। भिलाई नगर से विधायक हैं, जिसे मिनी इंडिया कहा जाता है। पार्टी के युवा चेहरा हैं।

 

 

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