15 सौ किसानों ने कराया बीमा, कंपनी ने 31 का बनाया क्लेम

कृषि विभाग के साथ ही बीमा कंपनी इफको टोकियो ने केंद्र के निदेर्शों को दरकिनार करते हुए फसल सर्वे के साथ ही क्षतिपूर्ति राशि निर्धारण में मनमर्जी की

भरत ठाकुर

बिलासपुर। जिले के 31 गांव ऐसे हैं जहां शत-प्रतिशत अकाल की स्थिति बनी थी। यहां के 15 सौ किसानों ने फसल का बीमा भी कराया था। इसके बाद भी इफको टोकियो कंपनी ने 31 किसानों का ही क्लेम बनाया है। इसे लेकर विवाद की स्थिति खड़ी हो गई है। केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत इस बार बीमाधारक किसान के खेत को इकाई माना गया है। मसलन फसल नुकसान होने की स्थिति में बीमाधारक किसानों के एक-एक खेत का सर्वे किया जाएगा और इसी आधार पर क्षतिपूर्ति की राशि तय की जाएगी। कृषि विभाग के साथ ही बीमा कंपनी इफको टोकियो ने केंद्र के निदेर्शों को दरकिनार करते हुए फसल सर्वे के साथ ही क्षतिपूर्ति राशि निर्धारण में मनमर्जी की है।

अनावारी रिपोर्ट पर नजर डालें तो जिले में 31 गांव ऐसे हैं जहां के किसान धान तो दूर खेतों से पैरा भी नहीं काट पाए हैं। आलम ये कि मवेशियों के चारा तक बाहर से खरीदना पड़ रहा है। इन गांव के 1500 किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से फसल बीमा कराया था। बीमा की राशि बीमा कंपनी को बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी। वहीं 31 किसानों की सूची बनाई है। इन्हीं किसानों को क्लेम दिया जाना है।

यहां के किसान हैं प्रभावित

बसहा, भाड़ी, मदनपुर, रामपुर, बसिया, संबलपुर, मोहभठ्ठा, सोनुपरी, आमागांव, चिसदा, गुड़ी, जांजी, खम्हरिया, मचखंडा, सीपत, ललाती, कटरा, भाड़म, काठाकोनी, खजुरी, परसदा, दर्री, डोमनुपर, करनकांपा, खम्हरिया, लिम्हा, रानीबदरा ।

बीमा कंपनी की सूची में किसानों का जिक्र ही नहीं

इफको टोकियो ने बीमा क्लेम के लिए कलेक्टर व कृषि विभाग को गांव व प्रभावित किसानों के नाम सहित जो सूची सौंपी है उसे लेकर एक बार फिर विवाद की स्थिति बनने लगी है। सूची में कितने किसानों को क्लेम देना है,इसका जिक्र ही नहीं किया गया है।

62 हजार 525 किसानों ने कराया बीमा,10 हजार 799 को ही पाया पात्र

फसल बीमा कंपनी ने 62 हजार 525 किसानों का बीमा किया था। इनमें 10 हजार 799 किसानों का क्लेम बनाया गया है। 51 हजार 726 किसानों को क्षतिपूर्ति के लायक नहीं माना है।
इस मामले में इफको टोकियो कंपनी के स्टेट मैनेजर वैभव शुक्ला का कहना है कि औसत उपज के हिसाब से क्लेम का निर्धारण किया जाता है। मापदंड के आधार पर ही हम लोगों ने सर्वे किया है और प्रभावित किसानों की सूची बनाई है।

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