गांधी जी की 150 वीं जयंती: बापू की करूणा का संचार, जेलों में सदाचार विषय पर विचार-गोष्ठी

आलोक मिश्रा बलौदा बाजार

बलौदाबाजार. महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर आज यहां उप जेल प्रांगण में ‘बापू की करूणा का संचार, जेलों में सदाचार’ विषय पर विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया. जेल में बंद कैदियों को गांधी जी के विचारों से अवगत कराने के लिए राज्य सरकार के जेल विभाग के निर्देशानुसार इनका आयोजन हुआ. जिला कलेक्टर कार्तिकेया गोयल सहित गांधीवादी विचारक सोहनलाल यदु, रमाकांत झा एवं समाजसेविका स्मिता सिंह ने उपस्थित कैदियों को गांधी जी के विचारों से अवगत कराते हुए उनसे प्रेरणा लेकर अपने भावी जीवन को अपने परिवार सहित समाज एवं देश के लिए उपयोगी बनाने का आह्वान किया गया.

गांधीवादी कार्यकर्ता सोहनलाल यदु ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि जेल लोगों के लिए सुधारगृह के समान काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां अधिकांश लोग सज्जन दिख रहे हैं. क्षणिक आवेश में कुछ नियम विरूद्ध काम हो जाने की वजह से उन्हें यहां आना पड़ा है. उनमें सुधार की काफी गुंजाइश है. गांधी जी के अपराध और अपराधियों के संबंध में विचारों से उन्हें काफी प्रेरणा मिलेगी. उन्होंने कहा कि गांधी जी भी अपने जीवन का अधिकांश भाग जेलों में बिताए.

गांधी जी की 150 वीं जयंती पर स्थानीय उप जेल में कार्यक्रम

जिस प्रकार वे जेल से और अधिक सशक्त होकर बाहर निकले वैसे ही परिवर्तन आप लोगों में दिखने चाहिए. प्रोफेसर रमाकांत झा ने कहा कि हमें गांधी जी जैसे नरम दिल रखकर काम करना चाहिए. नरम दिल से किये गए काम ज्यादा स्थाई और प्रेरणादायी होते हैं. इसलिए आज पूरा विश्व गांधी जी के सामने नतमस्तक है. समाजसेवी स्मिता सिंह ने कहा कि हमे अपने पिछली घटनाओं को भूलकर आगे की सोचना चाहिए. इसी में जीवन की सार्थकता है.

कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने देश को आजादी दिलाने से लेकर इसकी एकता और अखण्डता बनाये रखने में गांधी जी की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज के समय में ज्यादा प्रासंगिक हैं. उन्होंने कैदियों से कहा कि आप लोग वर्तमान हालात से निराश ना हों. आपको अपने जीवन सुधारने का मौका मिला है. हर दिन नया अवसर लेकर आता है. आप लोगों के निरूद्ध रहने से न केवल आपके परिवार बल्कि समाज और देश को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

अपने जीवन में सकारात्मक सुधार लेकर जब जेल से छूटेंगे तो आपकी उपयोगिता साबित होगी. गांधी जी से प्रेरित होकर जाएंगे तो देश और समाज ज्यादा मजबूत होगा. कैदियों को गांधी के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘एक थे बापू’ के कुछ पाठ पढ़कर सुनाये गए. उपस्थित अतिथियों को गांधी जी की प्रिय पुस्तक ‘ गीता’ की प्रतियां भेंट की गई. जेल अधीक्षक अभिषेक मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रकट किया.

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