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सिर से जुड़वां बच्चों 16 घंटे सर्जरी और 40 डॉक्टर फिर अलग हुए जग्गा- कलिया

सिर से जुड़वां बच्चों 16 घंटे सर्जरी और 40 डॉक्टर फिर अलग हुए जग्गा- कलिया

मेडिकल साइंस की दुनिया में इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है.16 घंटे की सर्जरी के बाद ओडिशा के सिर से जुड़वां बच्चों जग्गा और कलिया को एम्स के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक अलग कर दिया है.
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स ने एक बयान जारी कर बताया कि सर्जरी कामयाब रही है और बच्चों की हालत स्थिर है.एम्स के एक सीनियर डॉक्टर ने कहा, ओडिशा के ये दोनों बच्चे सिर से जुड़वां थे और मेडिकल साइंस में ऐसा बहुत कम देखने या सुनने को मिलता है.

मैराथन सर्जरी
एम्स की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, “ये ऑपरेशन 25 अक्टूबर को सुबह छह बजे शुरू हुआ. इसमें 20 सर्जनों और 10 एनीस्थीसिया विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. इसकी सर्जरी 16 घंटे चली और 20 घंटे एनीस्थीसिया में लगे. बुधवार को रात 8:45 बजे बच्चे के सिर अलग कर लिए गए.”

दो साल चार महीने के जग्गा और कलिया के पिता भुइया कंहरा ने इसी अगस्त में बच्चों के एक ऑपरेशन के बाद बीबीसी से एक बातचीत में कहा था, “हमने तो बच्चों को ठीक देखने के लिए अपना सब कुछ लगा दिया है. शुरुआत में जब हम एम्स आए तो हमें काफ़ी डर लग रहा था. लेकिन अब जब पहला ऑपरेशन सफ़ल हुआ है तो हम कुछ-कुछ आश्वस्त हुए हैं. लेकिन अभी भी दिल में एक डर समाया हुआ है. डॉक्टर साहब ने कहा है कि ऑपरेशन ठीक हुआ है और अब चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन फ़िर भी एक डर में तो जी ही रहे हैं हम.

भुइया कंहरा और उनकी पत्नी पुष्पांजलि कंहरा ओडिशा के कंधमाल ज़िले के रहने वाले हैं. पेशे से किसान कंहार परिवार ने अपने बच्चों का शुरू में कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने की कोशिश की.

लेकिन जब ये कोशिशें सफ़ल नहीं हुईं तो भुइया कंहार अपने बच्चों को लेकर वापस अपने गांव चले गए.कटक के अपने गांव मिलिपाडा पहुंचे भुइया कंहार अपने बच्चों के ठीक होने की पूरी उम्मीद खो चुके थे, लेकिन फ़िर एक मीडिया रिपोर्ट में इन बच्चों का ज़िक्र हुआ.

इसके बाद ज़िला प्रशासन ने ज़रूरी कदम उठाकर बच्चों को दिल्ली के एम्स में बच्चों का इलाज कराने के लिए ज़रूरी बंदोबस्त किया

भुइया ने बीबीसी के साथ अपना अनुभव साझा करते हुए बताया था, “हम उम्मीद खो चुके थे. पूरी तरह निराश थे. लेकिन जब मीडिया में रिपोर्ट आई तो राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन ने हमारी मदद की. राज्य सरकार ने हमारे बच्चों के इलाज के लिए एक करोड़ रुपये की राशि भी जारी की. अब हमारी उम्मीद जगी है कि हमारे बच्चे ठीक हो जाएंगे.

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