छत्तीसगढ़

FCC की रिपोर्ट में 26 में से 18 कंपनियों का सरिया मानकों पर फेल

ध्यान रहे घटिया सरिए का इस्तेमाल तो जान का जोखिम

रायगढ़ :

वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले समय में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उपभोक्ता होगा । सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसे मूलभूत ढांचागत क्षेत्र में तेजी से बदलाव की ओर अग्रसर भारत में विकास की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं लेकिन पुल, सड़क और भवनों के अचानक या समय से पहले गिरने की घटनाओं ने विशेषज्ञों को सोचने पर विवश कर दिया है।

इस आलोक में बुनियादी ढांचा क्षेत्र के थिंकटैंक “फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल” की रिपोर्ट चौकाने वाली है, जिसमें घटिया सरिये के इस्तेमाल के कारण लाखों लोगों का जीवन खतरे में बताया गया है। सरकारें न जाने कब इस ओर ध्यान दें, अथवा कुछ और हादसों का इंतजार करें लेकिन उपभोक्ताओं को जल्द ही जागरूक होना होगा ताकि वे और उनका परिवार जहां रह रहा है, उनकी सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मानकों पर फेल अनेक ब्रांड ऐसे हैं,जिनका प्रचार बड़े-बड़े स्टार और क्रिकेटर कर रहे हैं। इस बीच, नई दिल्ली में इंडियन स्टील एसोसिएशन के 25-26 अक्टूबर को हुए कॉन्क्लेव में इस्पात मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह ने सरिया निर्माताओं से बीआईएस ( ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) मानकों का पालन करने की अपील की है।

कोलकाता, भुबनेश्वर में ब्रिज का ढहना, मुंबई के वडाला स्थित लॉयड एस्टेट में पार्किंग स्थल का धंसना और गाजियाबाद के वसुंधरा में सड़क टूटकर खाई में तब्दील हो जाना ऐसे उदाहरण हैं जो देश में बुनियादी ढांचे के विकास में आ रही कमियों की ओर ध्यान दिला रहे हैं।

ऐसे अनगिनत मामले सामने आए हैं, जिनमें घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण न सिर्फ करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है बल्कि बेशकीमती जानें भी गई हैं। इन्हीं हादसों की वजहों की ओर इशारा करती हुई फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि घटिया सरिये के इस्तेमाल के कारण भारत का 5.7 खरब रुपये निवेश वाला बुनियादी ढांचा क्षेत्र खतरे में है।

संस्था ने 26 कंपनियों के सरियों की जांच प्रयोगशाला में की, जिनमें 18 के नमूने मानकों पर खरा नहीं उतर पाए। इन कंपनियों के 70% उत्पाद लैब टेस्ट में फेल पाए गए। किसी में फॉसफोरस तो किसी में सल्फर और किसी में फॉसफोरस और सल्फर दोनों की मात्रा चिंताजनक स्तर तक पाई गई, जो हल्की-सी नमी के कारण भी जंग पकड़ सकती है और सड़क, ब्रिज अथवा भवन की उम्र घटा सकती है।

ये कभी भी ढह सकते हैं और भारी जान-माल के नुकसान का कारण बन सकते हैं। फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल के अध्यक्ष प्रताप पडोडे ने बताया कि इन ब्रांड के दो-दो नमूने सरकार से प्रमाणित लैब में परीक्षण के लिए भेजे गए थे लेकिन इनके नतीजों ने सरिया निर्माण करने वाली कंपनियों के काम करने के तरीकों पर सवाल खड़ा कर दिया है।

पडोडे ने देश के अलग-अलग हिस्सों में घर और ब्रिज गिरने की घटनाओं के संदर्भ में कहा कि जांच में इनके निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार यह बात भी सामने आई कि ये कंपनियां जिन सरियों का लैब में परीक्षण कराना होता है, उसकी गुणवत्ता ठीक रखती हैं लेकिन शेष उत्पाद में खतरनाक रूप से मिलावट करती हैं।

ये कंपनियां सरिया बनाने में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी बीआईएस की गाइड लाइंस का पालन नहीं करती हैं। इन सरियों के निर्माण में कई प्रकार की रासायनिक अशुद्धियां शामिल होती हैं। काउंसिल ने इन अशुद्धियों में शामिल फॉस्फोरस

और सल्फर की मात्रा जांचने के लिए ही कई ब्रांड्स के सरिये सरकार से प्रमाणित लैब में भेजे थे, जिसमें से 70 फीसदी ब्रांड के नमूने बुरी तरह फेल हो गए। इस सर्वे के बाद देश के मूलभूत ढांचा क्षेत्र के विकास पर सवालिया निशान लग गया है।

फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल इस रिपोर्ट को इस्पात मंत्रालय को सौंपेगी ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। काउंसिल का कहना है कि दो तरह के सरिया निर्माता हैं। एक वे जो लौह अयस्क से सरिया निर्माण करते हैं और जिन्हें प्राइमरी प्रोड्यूसर कहा जाता है तो दूसरे वे जो कबाड़ का इस्तेमाल करते हैं।

लौह अयस्क का इस्तेमाल करने वाले ब्लास्ट फर्नेस या डीआरआई, बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस, लैडल रिफाइनिंग फर्नेस और अन्य आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर फॉसफोरस और सल्फर की मात्रा संतुलित रखते हैं जबकि कबाड़ से सरिया बनाने वाले आम तौर पर इंडक्शन फर्नेस का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसी अशुद्धियों वाले सरिये सीलन के दौरान तेजी से जंग पकड़ते हैं। सरिये में सल्फर की मात्रा अधिक होने पर आग लगने की स्थिति में उसके जल्द पिघलने की भी आशंका होती है। बताया जाता है कि न्यूयॉर्क के ट्विन टावर पर हमले के बाद उसके ढहने की एक प्रमुख वजह उसके निर्माण में लगे सरिये में सल्फर की अधिक मात्रा थी।

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FCC की रिपोर्ट में 26 में से 18 कंपनियों का सरिया मानकों पर फेल
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