सुशासन के 20 साल: ग्राम सशक्तिकरण के सिपाही बने पीएम नरेंद्र मोदी

देश जब आजाद हुआ तो गरीबी विरासत में मिली, लेकिन दशकों बीत जाने के बाद भी गरीबी न मिटी। ग्रामीण भारत में पिछड़ापन, किसानों की दुर्दशा नेतृत्व में एक कमी का सीधा प्रमाण था। जहां-जहां प्रयास हुआ तकदीर बदली। यही वो विश्वास था, जिसने मात्र 7 सालों में देश की तस्वीर बदल दी। इसका आधार बना गुजरात का अनुभव। इसका मंत्र था खेती के अलावा पशुपालन और गृह उद्योग को बढ़ावा देना। पहले महिलाओं की बेबसी और युवाओं के मुरझाए चेहरे दिखाई देते थे। गांव के गलियारों में सपनों के पूरा होने की कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आती थी। बड़े-बड़े दावों और नारों के बीच जनता अपनी सरकारें चुनती रही, लेकिन ढाक के तीन पात। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाने की इच्छाशक्ति राजनीति से जैसे कोसों दूर थी। लेकिन समय बदला और नए भारत का वक्त आया। राजनीति में सेवा समर्पण और सुशासन की भावना ने विकास का नया ताना-बाना बुना। और ये था पीएम मोदी का राजनीति में आना का प्रभाव।

ग्राम स्वराज्य का सपना किया साकार

पीएम मोदी कहते हैं हमारे गांव भारत के विकास और आत्मनिर्भरता के अहम केंद्र रहे हैं। पीएम मोदी के अनुसार पूज्य बापू कहते थे कि आत्मनिर्भरता से उनका मतलब था ऐसे गांव जो अपनी मूलभूत जरूरत को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर हों। हमें नए नए अवसरों को, नई-नई संभावनाओं को तलाशते हुए आगे बढ़ना होगा। बापू के ग्राम स्वराज्य की शुरूआत भी बापू की जन्मभूमि यानि गुजरात से ही हुई। इसमें सबसे अधिक हाथ रहा, राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी का। पुंसरी गांव से शुरू हुई थी ये यात्रा, जिसके सूत्रधार वहां के युवा सरपंच हिमांशु पटेल बने। जिसके पीछे थी सेवा की भवना और समर्पण का भाव। गांव में सिटी बस, बच्चों के लिए कंप्युटर , आधुनिक सरकारी स्कूल, गोबर गैस प्लांट जिससे गांव की बिजली बनती है। हिमांशु पटेल इस सबका श्रेय मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हैं।

कहां से मिला पीएम को सेवा का मंत्र

वर्तमान पर हिमांशु कहते हैं कि जैसे मेरे गाँव का कायाकल्प हुआ वैसे ही अब प्रधानमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी देश के अन्य गांवों का कायाकल्प कर रहे हैं। हर दिन देश के गांव डिजिटल इंडिया से जुड़ते जा रहे हैं। इस सेवा और समर्पण का मूल मंत्र नरेंद्र भाई को उन्ही के गांव के एक डॉक्टर से मिला। डॉक्टर द्वारका दास जोशी से, जो मानते थे कि देश सेवा के लिए लगन जरूरी है बाकि सब चीजें पीछे रह जाती हैं। नरेंद्र भाई मोदी ने उसी वक्त से इसे अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया।

राजनीति से पहले करते रहे हैं देशसेवा

राजनीति में आने से पहले नरेंद्र मोदी जनसेवा करते रहे थे। इसी दौरान उन्हें देश के 400 से अधीक जिलों में प्रवास करने का अवसर मिला और उन्होंने ग्रामीण जीवन की मुश्किलों को करीब से देखा। जिसका फायदा उन्हें पहले मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के तौर पर निर्णय लेते वक्त मिलता है। जब तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे तो गुजरात की विकास दर हमेशा डबल डिजिट में रही। यह बहुत बड़ी बात थी एक राज्य का इतने लंबे समय तक विकास की रफ्तार को कायम रखना। कृषि विकास दर भी उस समय लगातार 9% के आसपास रहा।

इस तरह संभाला चुनौतियों को

जब नरेंद्र मोदी ने राज्य की बागडोर संभाली थी राज्य में राजनीतिक अस्थिरता थी, पानी की कमी से जूझ रहा था, वहीं कच्छ में आए भूकंप से राज्य की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई थी और फिर गोधरा दंगों के कारण राज्य की छवि बहुत अच्छी नही थी। जब नरेंद्र मोदी आए तो उन्होंने पाँच चीजों पर बहुत ध्यान दिया। जल शक्ति, ऊर्जा शक्ति, सुरक्षित बॉर्डर, जनशक्ति और कौशल पर विशेष ध्यान देना आदि ऐसे विषय थे जिन पर मुख्यमंत्री नरेंद्र ने सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया। पंचामृत, सुजलाम-सुफलाम, बेटी बचाओ, कर्मयोगी अभियान, ग्राम ज्योति योजना, कृषि महोत्सव, चिरंजीवी स्वच्छ अग्रही और स्वागत जैसी योजनाओं से गुजरात के ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया।

प्रधानमंत्री के तौर पर बड़े फैसले

भारत के गांवों में एक बड़ा हिस्सा ऐसा होता है, जिसे ‘आबादी इलाका’ कहा जाता है। ये वो जमीन है, जिसके स्वामित्व के कागज़ात मालिकों के पास नहीं होते। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इसे अपना मान कर हक जताते आए हैं। ऐसी जमीन पर मालिकाना हक के लिए काफ़ी झगड़े भी होते रहे हैं। लेकिन आज़ादी के बाद से अलग-अलग राज्यों में ऐसे ‘आबादी इलाक़े’ में पड़ने वाली जमीन का ना तो कभी सर्वे किया गया और ना ही इसके लीगल कागज तैयार करने की कोई पहल की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम ने स्वामित्व योजना लॉन्च की। इसके अलावा उज्ज्वला योजना, जन धन योजना, वन धन योजना, किसान सम्मान निधि, खाद पर सब्सिडी और एमएसपी पर पहले से अधिक गेंहू की खरीद और एमएसपी की लागत बढ़ाना ऐसे कुछ प्रमुख कदम रहे हैं जिससे सम्पूर्ण देश के ग्रामीण परिदृश्य में बदलाव आया है।

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