2500 मिलियन टन कोयला मोदी सरकार ने दीगर भाजपा शासित राज्यों को दिया

मुख्यमंत्री रमन सिंह से भूपेश बघेल ने की इस्तीफे की मांग

. भ्रष्टाचार में लिप्त एक कमजोर मुख्यमंत्री प्रदेश का किस तरह से नुकसान कर सकता है इसका उदाहरण हैं रमन सिंह।
. राष्ट्रीय स्तर पर रमन सिंह की छवि इतनी गिर गई है कि भाजपा नेतृत्व उनको पद से हटाना चाहता था लेकिन उन्होंने किसी तरह अपना पद बचाया है।
. पद बचाने के लिए हुई इस सौदेबाजी में उन्होंने छत्तीसगढ़ को अडानी के हाथों बेचना स्वीकार लिया है।
. तथ्य और आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की छह बड़ी ख़दानें सार्वजनिक क्षेत्रों की कंपनियों को आबंटित कर दिए गए हैं और इन सभी में पिछले दरवाजे से अडानी की कंपनियों को घुसा दिया गया है।
. इसका मतलब यह है कि कोल ब्लॉक जरुर सार्वजनिक क्षेत्रों की कंपनियों के नाम हैं लेकिन खदानों की असली मिल्कियत अडानी की कंपनियों के पास है।
. प्रदेश में कुल 88 मिलियन टन प्रति वर्ष कोयला निकालने का काम या तो अडानी के पास पहुंच चुका है या फिर इसकी तैयारी अंतिम चरणों में है।
. अडानी की कंपनी दावा कर रही है कि अगले एक दशक में उनका कोयला उत्पादन 150 मिलियन टन हो जाएगा यानी वह एलईलीएल से बड़े कोयला उत्पादक हो जाएंगे।
. और सरकार कोशिश कर रही है कि इसकी जानकारी सार्वजनिक न पाए।
. छत्तीसगढ़ की जनता के साथ ठगी हो रही है और उसे ही जानकारी नहीं दी जा रही है।

जानकारी छिपाने की वजह क्या है?

. छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी लिमिटेड ( CGSPCL) को गारे-3 कोल ब्लॉक आवंटित हुआ है।
. इसके बाद इस खदान को चलाने और कोयला निकालकर बेचने का ठेका अडानी की कंपनी को दिया गया है।
. सरकार टेंडर की पूरी कॉपी नहीं दे रही है और यह भी नहीं बता रही है कि MDO (Mine] Develop and Operate) की नियुक्ति किस आधार पर हुई है।
. सरकार MDO नियुक्त करने की शर्तों को बता नहीं रही है और CMSA (कोल माइनिंग सर्विस एग्रीमेंट) सार्वजनिक करने से इनकार कर रही है।
. छत्तीसगढ़ की जनता को यह जानने का पूरा हक है कि किस आधार पर टेंडर किया गया और किस आधार पर अडानी को एमडीओ नियुक्त किया गया।
. खबरें हैं कि CGSPCL को बाजार से भी महंगी दरों पर कोयला खरीदना पड़ रहा है।
. यानी छत्तीसगढ़ की कंपनी के पास कोल ब्लॉक है और वही अपना कोयला महंगी दरों पर खरीद रही है।

बेवजह क्यों खोद रहे हैं कोयला?

. पतुरिया गिधमुड़ी कोल ब्लॉक भैया थान पॉवर प्रोजेक्ट के लिए आवंटित किया गया है।
. यह पॉवर प्रोजेक्ट इंडिया बुल्स के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ सरकार को बनाना था।
. लेकिन यह परियोजना शुरु ही नहीं हो सकी और इंडिया बुल्स वापस चली गई।
. लेकिन इस कोल ब्लॉक से कोयला निकालने की तैयारी हो रही है।
. जब परियोजना ही नहीं है तो फिर कोयला क्यों निकाला जाएगा? किसके लिए निकाला जाएगा?
. छत्तीसगढ़ सरकार कोयला व्यापारी तो है नहीं तो फिर यह अडानी को उपकृत करने के अलावा और क्या है?
. दूसरी बात यह कि पतुरिया गिधमुड़ी कोल ब्लॉक हसदेव नदी के कैचमेंट एरिया में आता है।
. अगर यह कोल ब्लॉक शुरु हो गया तो हसदेव नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
. तो रमन सिंह किस कीमत पर अडानी को उपकृत करना चाहते हैं?

कहां गई छत्तीसगढ़ की चिंता?

. जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी तो गारे-2 कोल ब्लॉक महाराष्ट्र और तमिलनाडु सरकार को देने का फैसला किया गया था।
. तब रमन सिंह ने आसमान सर पर उठा लिया था कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के साथ भेदभाव कर रही है।
. तब यूपीए सरकार ने उड़ीसा में एक कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ को दिया था।
. लेकिन जब नरेंद्र मोदी ने गारे-1 कोल ब्लॉक गुजरात को और गारे-2 महाराष्ट्र को देने का फैसला किया तो रमन सिंह न केवल चुप्पी साधे बैठ गए बल्कि दोनों खदानों में अडानी को घुसाने का पुख्ता इंतजाम भी करके दिया।
. मोदी सरकार आने के बाद से किसी भी कोल ब्लॉक की नीलामी नहीं हुई है और सरकार ने भाजपा शासित राज्यों के सार्वजनिक क्षेत्रों को कोल ब्लॉक आवंटित कर दिए हैं।
. इसका मतलब है कि इन कोल ब्लॉकों की नीलामी से जो राशि मिलनी थी उसका विशुद्ध नुकसान हो गया और अब प्रदेश को सिर्फ रॉयल्टी का पैसा मिलेगा।
. एक और बड़ी खामी यह है कि जिस कंपनी को कोल ब्लॉक चलाने का ठेका दिया जा रहा है उसे भूमि अधिग्रहण का कार्य भी सौंप दिया गया है।
. अडानी की कंपनी पूरे इलाके में दहशत फैला रही है और लोगों पर दबाव डाल रही है कि वे अपने खेत, घर और गांव छोड़कर चले जाएं।
. कहां गया रमन सिंह का छत्तीसगढ़ प्रेम और जनहित की बात कहां गायब हो गई?
. हसदेव के जलग्रहण क्षेत्र में कोयला खनन से हसदेव नदी ही हो जायेगी समाप्त
. इन कोल ब्लाकों में कम से कम 700-800 रू प्रति टन फिक्स चार्ज आना था। 100 रू. प्रतिटन फिक्स चार्ज में आबंटन से छत्तीसगढ़ राज्य को हुआ नुकसान
. अडानी को लाभ पहुंचाने के लिये छत्तीसगढ़ के 50 आदिवासियों गांवों को उजाड़ा जा रहा है
. हिडाल्कों का गारे में ब्लाक 4/5
. जो कि गारे 1, 2, 3 से जुड़ा हुआ है अर्थात् भौगोलिक तथा अन्य परिस्थितियां एक जैसी है,
. 3502 रू. प्रतिटन लिया जा रहा है। (लिंक संलग्न)
. इसी तरह बाल्कों की चोटिया खदान में प्रतिटन 3025 रू. लिया जा रहा है। (लिंक संलग्न)
. पीएसयु वाले में कोल ब्लाक में सिर्फ 100 रू. प्रतिटन फिक्स चार्ज से छत्तीसगढ़ राज्य में हितों को हुआ बड़ा नुकसान- 125000 करोड़ का घोटाला
. सब कुछ स्पष्ट उजागर है।

रमन सिंह इस्तीफा दें

. रमन सिंह ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए अमित शाह और नरेंद्र मोदी से सौदा किया है।
. इस सौदे की शर्तों के अनुसार ही छत्तीसगढ़ को अडानी के हाथों बेचा जा रहा है।
. इसी सौदे के तहत मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को एक एक करके राज्यसभा में भेजा जा रहा है।
. छत्तीसगढ़ की जनता के हितों के साथ सौदा करके अपना पद बचाने की कोशिशों में लगे रमन सिंह को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

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