उत्तर प्रदेश

शाहजहांपुर में नसबंदी के बाद गर्भवती हुईं 29 महिलाएं

शाहजहांपुर में 29 महिलाएं गर्भवती हो गई। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ये वे महिलाएं हैं जिनकी सरकारी अस्पताल में नेशनल फैमिली प्लानिंग के तहत नसबंदी की गई थी।

उन महिलाओं ने नसबंदी के बाद भी गर्भवती होने के खिलाफ प्रदर्शन किया। महिलाओं के प्रदर्शन के बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा।

होगी जांच
सीएमओ ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए सर्जरी में लापरवाही करने वालों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। सीएमओ ने यह भी कहा है कि हर महिला को 30,000 रुपये का हर्जाना दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो पूरे जिले में इस साल बड़े नसबंदी के कैंप लगाए गए। इन कैंप में 650 से ज्यादा महिलाओं की नसबंदी की गई है।

नसबंदी फेल होने की होती है संभावना
सीएमओ डॉ. आरपी रावत ने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं हैं। नसबंदी के फेल होने की संभावना रहती है। फेलोपियन ट्यूब में जो रिंग डाली जाती है वह कई बार ऑपरेशन के बाद खिसक जाती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग अब एक ऐसे विशेषज्ञों की लिस्ट तैयार कर रहा है जिन्होंने पिछले वर्षों में सफल ऑपरेशन किए हैं। अब सिर्फ ऐसे विशेषज्ञों से ही नसबंदी कराई जाएगी।

मिलेगा हर्जाना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नसबंदी असफल होने के इस तरह के केस आते हैं तो ऐसे मामले में 30,000 का हर्जाना दिए जाने का प्रावधान है। जिन महिलाओं ने इसकी शिकायत की है उनमें से अधिकांश का वैरीफिकेशन हो चुका है बाकी का वैरीफिकेशन जल्दी पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं की लिस्ट फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट के सुपरीटेंडेंट को भेज दी गई है। वह इस फैक्ट्स का वैरीफिकेशन करेगें। उसके बाद उन्हें 30,000 रुपये हर्जाना दिया जाएगा।

तीन कारणों से नसबंदी होती है असफल

डॉक्टर्स ने बताया कि नसबंदी असफल होने के तीन बड़े कारण होते हैं। कुछ महिलाओं में सर्जरी के दौरान गर्भावस्था से बचाने के लिए जो फेलोपियन ट्यूब काटी जाती है वह फिर से बन जाती है। इस वजह से महिलाएं नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो जाती हैं। इस मामले में कोई कुछ नहीं कर सकता है। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के बाद अगर तुरंत नसबंदी की जाती है तो फेलोपियन ट्यूब के फिर से बढ़ जाने के जांच ज्यादा होते हैं।

डॉक्टर्स ने बताया कि शाहजहांपुर में जितने भी केसेस आए हैं उनमें हो सकता है कई महिलाएं सर्जरी से पहले ही शुरुआती गर्भ से हों। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि वे उनकी माहवारी खत्म होने के तत्काल बाद सर्जरी करवा लें और यह सुनिश्चित हो कि उससे पहले उन्होंने उनके साथी के साथ शारीरिक संबध न बनाए हों। डॉक्टर्स ने बताया कि नसबंदी असफल होने का तीसरा कारण सर्जरी में की गई गलती होता है।

उड़ीसा सरकार को भी देना पड़ा था जुर्माना
यूपी के शाहजहांपुर में यह अकेला मामला नहीं है। इस साल उड़ीसा सरकार को भी 30,000 रुपये हर्जाना नसबंदी के बाद गर्भवती हुई महिलाओं को देना पड़ा था। उड़ीसा में 2015 को नसबंदी के बाद 354 महिलाएं गर्भवती हो गई थीं। सरकार को इससे 1.06 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस साल यहां 1.14 लाख महिलाओं को गर्भवती होने से बचाने के लिए नसबंदी की गई थी।

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