दो टूक (श्याम वेताल) : भूपेश सरकार के 30 दिन-सभी फैसले जनहितकारी

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श्याम वेताल

छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष के भाजपा शासन के बाद भूपेश बघेल के नेतृत्व में आयी कांग्रेस सरकार का आज एक महीना पूरा हो गया। इस एक महीने में भूपेश सरकार ने 14 बड़े फैसले लिए हैं। इसमें चुनावी घोषणा पत्र का सबसे बड़ा वादा भी पूरा हुआ है।

यह वादा किसानों के अल्पकालीन कर्ज की माफ़ी का रहा। राज्य के 16 लाख किसानों के अल्पकालीन कर्ज को माफ किया गया है। किसानों से संबंधित दूसरा बड़ा वादा 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी का भी पूरा किया गया है।

इसके अलावा बस्तर में उद्योग नहीं लगाने पर टाटा से वापस लेकर आदिवासियों को जमीन वापसी की घोषणा भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है।

राज्य सरकार द्वारा 30 दिनों में लिए गए 14 बड़े फैसले का जिक्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज जनता के नाम चिट्ठी में किया है। उन्होंने यह चिट्ठी आज मीडिया में विज्ञापन के माध्यम से जारी की है। इस चिट्ठी के जरिए बताया गया है कि राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए मानक बोरा किया गया है। निरस्त वन अधिकार पट्टों की पुन: जांच की घोषणा भी की गई है।

इस तीस दिनों में लिए गए दो बहुचर्चित फैसलों का जिक्र करना जरूरी है। इनमें झीरम घटना और नान घोटले की एसआईटी जांच शुरू करना महत्वपूर्ण है। भाजपा शासन ने झीरम और नान घोटले की जो जांच कराई थी लेकिन उससे कांग्रेस संतुष्ट नहीं थी। इसलिए दोनों मामलों में नए सिरे से जांच करायी जाएगी।

इसके अतिरिक्त ई- टेंडरिंग घोटाले की जांच इओडब्ल्यू से कराने की घोषणा की गई है। बताते चलें कि ई- टेंडरिंग घोटाले का जिक्र सीएजी की रिपोर्ट में भी किया गया है।

राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे ताबड़तोड़ फैसलों से विरोध पक्ष हिला हुआ है और विपक्षी नेताओं का अरण्य रोदन शुरू हो गया है। भाजपा ने कहा है कि राज्य सरकार संविधान के विरुध फैसले ले रही है जबकि जोगी कांग्रेस को कहना है कि जब से कांग्रेस सरकार सत्ता में आयी है तब से पार्टी के अंदर गुटबाजी बढ़ी है।कई बड़े कांग्रेसी नेता मंत्री पद न मिलने से असंतुष्ट हैं।

खैर विपक्षी नेता अपना धर्म निभा रहे हैं लेकिन आज छत्तीसगढ़ का जनमत कांग्रेस के साथ है ,इसलिए कांग्रेस ताकतवार है। कोई कुछ कहे, उसका फर्क नहीं पड़ने वाला है।

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