रहस्यमयी बीमारी से अब तक 345 पहुंचे अस्पताल, मुख्यमंत्री ने जाना मरीजों का हाल

आंध्र प्रदेश

अमरावती (आंध्र प्रदेश) । पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु शहर में रहस्यमयी बीमारी से पीड़ितोंं का आंंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। अचानक उल्टी, बदन दर्द, तेज़ बुखार, चक्कर आना और मुंह से झाग आने जैसे लक्षणों के साथ अब तक 345 पीड़ित अस्पतालों मे इलाज करवा चुके हैं। गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी आज एलुरु के सरकारी अस्पताल पहुंचे और पीड़ितोंं का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने अधिकारियोंं के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों का समुचित मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

दरअसल, पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु शहर के पडमरा मार्ग क्षेत्र में शनिवार शाम से लोगों के बीमार होने का सिलसिला शुरू हो गया। धीरे धीरे सरकारी अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या बढ़ने लगी। आज सुबह भी पांच लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब तक 345 पीड़ित अस्पताल आ चुके हैं। अधिकांश मरीजों को स्वास्थ्य सुधार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, लेकिन कल रात से अब तक 28 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।

घटना गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी आज पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु पहुंच गये। वे हेलीपैड से सीधे एलुरु सरकारी अस्पताल पहुंंचे। यहां उन्होंने अस्पताल में भर्ती इस रहस्यमयी बीमारी से पीड़ित मरीजों का हालचाल पूछा। बाद में मुख्यमंत्री रेड्डी ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और जिलाधीश के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान राज्य के उपमुख्यमंत्री अल्ला काली कृष्णा श्रीनिवास उर्फ अल्ला नानी और तिरुमला बालाजी मंदिर के अध्यक्ष सुब्बारेड्डी और स्थानीय विधायक भी मौजूद रहे। अस्पताल के सूत्रों से पता चला है कि बेहोश हालत में अस्पताल आये एक मरीज (45) की आज मौत हो गई।

इस बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर अभी कुछ बता नहीं पा रहे हैं। पीड़ितों की चिकित्सा जांच से भी बीमारी के कारण का पता नहीं चल सका है। ज्यादातर पीड़ितों की उम्र 45 से अधिक लेकर 12 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैंं। एक अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों के रक्त के नमूने हैदराबाद की भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान को भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के कारणों का पता चल सकेगा। कुछ पीड़ितों को बेहतर इलाज के लिए गुंटूर और विजयवाड़ा अस्पतालों में भी स्थानांतरित किया जा रहा है।

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