3500 दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिवार को नहीं मिली अनुकम्पा नियुक्ति

अनुकम्पा नियुक्ति देकर इन परिवारों को दें राहत :विरेन्द्र दुबे

रायपुर :प्रदेश के करीब 3500 दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिवार को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है।ऐसे में शिक्षाकर्मियों का परिवार दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है। पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सरकार को इस विसंगति को दूर करने की मांग की है।
शिक्षाकर्मी नेता विरेन्द्र दुबे ने कहा कि इस विसंगति को दूर करते हुए क्रमोन्नति सह संविलियन सहित प्रमुख 9 मांगो में अनुकम्पा नियुक्ति है ।यह महत्वपूर्ण और हृदय की संवेदना से जुड़ी एक मांग है।

क्या है अनुकम्पा नियुक्ति ?

अनुकम्पा,संवेदना से ओतप्रोत शब्द है, जिसका आशय मृतक शासकीय सेवक के उस परिवार से है जिसके पास आय का समुचित साधन न हो और आर्थिक संकट से घिरा हो, तथा उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता हो तो उस परिवार के आश्रित को उस विभाग में उसके न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाती है।

प्रदेश के अन्य कर्मचारियों के लिए “अनुकम्पा नियुक्ति” हेतु नियम क्या है..??

दिवंगत शासकीय सेवक के आश्रित को उनके शैक्षणिक योग्यता के आधार पर विभाग के तृतीय अथवा चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर तत्काल अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाती है,भर्ती नियम के अन्य आवश्यक अहर्ताओं के लिए कंडिका 5 के तहत छूट व शिथिलीकरण करते हुए व्यावसायिक योग्यता प्राप्त करने हेतु समय प्रदान किया जाता है।

दिवंगत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों के लिए अनुकम्पा नियुक्ति के नियम क्या हैं..?

दिवंगत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति में कोई छूट या शिथिलीकरण नही दी जा रही है। सीधी भर्ती हेतु जो अनिवार्य योग्यता तय की गई वही योग्यता दिवंगत शिक्षाकर्मी के आश्रित से मांगी जाती है अर्थात सहायक शिक्षक पँ पद हेतु 12 वी उत्तीर्ण होने के साथ व्यावसायिक योग्यता “डीएड और टेट” की अनिवार्यता भी मांगी जाती है।जिसके कारण प्रदेश में दिवंगत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों के अनुकम्पा नियुक्ति के लगभग 3500 से भी अधिक प्रकरण लंबित हैं।जिससे उनके परिवार के समक्ष अत्यंत आर्थिक संकट आ चुका है।जो कि सर्वथा गलत है

शिक्षाकर्मियों के अनुकम्पा नियुक्ति नियम में क्या गलत है..?

अनुकम्पा एक विशेष राहत है,बिना किसी पेंशन अथवा बिना किसी आय के आर्थिक संकटों से जूझ रहे दिवंगत शिक्षाकर्मी के आश्रित के लिए डीएड में प्रवेश लेना तथा 2 वर्ष तक बिना किसी आय के पढ़ाई करना, लगातार 2 वर्षो तक फीस जमा करना,कम पीड़ादायक नही है,फिर ऊपर से टेट पास करना ठीक वैसा ही है जैसे करेला ऊपर से नीम चढ़ा। यदि आश्रित परिवार सामान्य जाति से हुआ तब तो इन व्यावसायिक योग्यताओं को प्राप्त करना और भी कठिन हो जाता है क्योंकि इन सबमे उत्तीर्ण होने के लिए सामान्य जाति के लोगो को अधिक अंक लाना पड़ता है। इसी तरह यदि आश्रित 12 वी से कम पढ़ी लिखी है तो उनके लिए चतुर्थ वर्ग के पदों पर भर्ती के कोई नियम नही हैं,जबकि अन्य कर्मचारियों के आश्रितों को उसके शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए प्यून आदि चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति दे दी जाती है।
क्या होना चाहिए..?

>दिवंगत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों को भी प्रदेश के अन्य कर्मचारियों की भांति उनके शैक्षिणक योग्यता के आधार तत्काल अनुकम्पा प्रदान की जानी चाहिए। नियुक्ति पश्चात अनिवार्य व्यावसायिक योग्यता हेतु पर्याप्त समय प्रदान किया जाना चाहिए,तथा …<>

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