38 लाख के बारदानों की गड़बड़ी,शासन ने रोका 10 करोड़ का कमीशन

भरत ठाकुर

बिलासपुर। खाद्य विभाग ने जिले के 115 मिलर्स को कस्टम मिलिंग के तहत एफसीआई को चावल देने अधिकृत किया है। मिलरों को धान का उठाव करने के लिए मार्कफेड ने बारदाना का वितरण किया था। शर्त रखी गई थी कि कस्टम मिलिंग के तहत भारतीय खाद्य निगम के गोदाम में चावल जमा कराने के बाद बारदानों की वापसी करनी होगी। मिलर्स ने अब तक बारदाना नहीं लौटाया है।

इसका खामियाजा समितियों को भुगतना पड़ रहा है।

राज्य शासन ने मार्कफेड को पत्र लिखकर 38 लाख रुपए का बारदाना लौटाने का फरमान जारी किया है। बारदाना न लौटाने के कारण समितियों को कमीशन के तौर पर मिलने वाली 10 करोड़ रुपए की राशि पर रोक लगा दी है।

मिलर्स की लापरवाही का खामियाजा समर्थन मूल्य पर धान खरीदने वाली समितियों को भुगतना पड़ रहा है। समितियों के साथ ही मार्कफेड के अफसरों पर भी तलवार लटक गई है। दरअसल धान खरीदी के वक्त धान का उठाव करने के लिए राज्य शासन द्वारा मार्कफेंड को बारदाना की आपूर्ति की जाती है।

जिला विपणन कार्यालय द्वारा अपनी देखरेख में मिलर्स को बारदाना दिया जाता है। बारदाना देते वक्त मिलर्स की सूची भी बनाई जाती है। पूरा हिसाब मार्कफेड को रखना होता है। जितनी मात्रा में बारदाना मिलर्स को दिया जाता है काम पूरा होने के बाद उसी हिसाब से वापस लिया जाता है। बारदानों की वापसी के बाद इसकी जानकारी राज्य शासन को दी जाती है और मार्कफेड उसे अपनी जिम्मेदारी पर सुरक्षित रखता है। धान खरीदी के दौरान बारदानों का फिर उपयोग किया जाता है।

बता दें कि कस्टम मिलिंग के बाद मार्कफेड ने राज्य शासन को 38 लाख रुपए कीमत के बारदानों का हिसाब नहीं भेजा है। मार्कफेड और मिलर्स की लापरवाही का खामियाजा समितियों को भुगतना पड़ रहा है। बीते दो खरीफ सीजन से राज्य शासन ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाली समितियों को जीरो फीसदी शॉर्टेज पर कमीशन देने का आॅफर दिया है। इसके चलते बीते दो वर्ष से समितियों द्वारा खरीदी के बाद धान का परिवहन कराया जा रहा है। इसके चलते समितियों ने जीरो फीसदी शॉर्टेज का कीर्तिमान बना दिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत बिलासपुर,मुंगेली,जांजगीर-चांपा व कोरबा जिले को शमिल किया गया है। जिले में 284 समितियां है। इन्हीं समितियों के जरिए किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदी जाता है। जीरो फीसदी शॉर्टेज के कारण बतौर कमीशन राज्य शासन द्वारा समितियों को 10 करोड़ का भुगतान किया जाना है।

0-कमीशन पर सहकारी बैंक की भी लगी नजर

समितियों को मिलने वाले 10 करोड़ के कमीशन पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की भी नजरें लगी हुई हैं। बैंक के अंतर्गत आने वाली 240 से अधिक समितियों पर एक करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक का कर्ज है। कमीशन की राशि मिलते ही बैंक इस पर अपना हक जताएगा। शासन से राशि मिलते ही बैंक प्रबंधन पहले समितियों के खाते में इसे जमा करेगा और तत्काल बाद कर्ज की वसूली दिखाते हुए वसूली कर लेगा ।

0 आधा दर्जन मिलर्स ब्लैक लिस्टेड

कस्टम मिलिंग को लेकर जिला प्रशासन व जिले के मिलर्स के बीच बीते दो वर्ष से विवाद की स्थिति बनी हुई है। इस वर्ष धान खरीदी के दौरान मिलरों ने खाद्य विभाग में पंजीयन कराने में कोताही बरती थी। इसके चलते कलेक्टर पी दयानंद ने कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन न कराने वाले मिलर्स को ब्लैक लिस्टेड करने फूड कंट्रोलर को आदेश जारी कर दिया था।

कलेक्टर के निर्देश के बाद मिलरों ने पंजीयन कराया था। पंजीयन कराने के बाद धान का उठाव तो किया पर कस्टम मिलिंग में कोताही बरती । इसके चलते फूड कंट्रोलर ने जिले के आधे मिलर्स को ब्लैक लिस्टेड कर दिया था।

कस्टम मिलिंग के बाद मिलर्स को बारदानों की वापसी करने का नियम है।

नियमानुसार मार्कफेड में बारदाना लौटाना है। शासन ने पत्र लिखकर 38 लाख रुपये कीमत के बारदानों की वापसी न करने को लेकर नाराजगी जताई है। मिलर्स द्वारा बारदाना न लौटाए जाने पर समितियों को मिलने वाली 10 करोड़ का कमीशन रोक दिया है।<>

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