आज राष्ट्रीय राजधानी के 400 पेट्रोल पंप बंद, जेल भरो आंदोलन की घोषणा

धरने के दौरान डीटीसी बसों का सड़कों पर टोटा हो सकता है

नई दिल्ली :

देश भर में पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने से दिल्ली सरकार द्वारा इनकार किए जाने की वजह से नाराज पेट्रोल पंप मालिकों ने आज हड़ताल बुलाई है। यह बात दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (डीपीडीए) ने दिल्ली सरकार के खिलाफ बयान जारी कर कही।

यही नहीं दिल्ली के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनें गलत परिवहन नीतियों के विरोध में सोमवार को हड़ताल पर रहेंगी। हड़ताल में दिल्ली से बाहर की यूनियनें भी शामिल हो रही हैं। ऑटो और टैक्सी चालक संगठनों ने सड़कों पर चक्का जाम और जेल भरो आंदोलन की घोषणा की है।

जनता की मुसीबतें यहीं कम होने वाली नहीं हैं। राजधानी में डीटीसी कर्मचारी सोमवार धरना-प्रदर्शन पर रहेंगे। प्रदर्शन में डीटीसी के अधिकतर कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। धरना-प्रदर्शन को नमक-रोटी का नाम दिया है।

सुबह 6 बजे से 24 घंटे के लिये बंद रहेंगे पंप

डीपीडीए ने बयान में कहा कि दिल्ली में करीब 400 पेट्रोल पंप ऐसे हैं, इनमें कइयों से सीएनजी स्टेशन भी जुड़े हुए हैं, यह सभी दिल्ली सरकार के फैसले के विरोध में आज सुबह 6 बजे से 24 घंटे के लिये बंद रहेंगे। ये सभी पंप मंगलवार सुबह 5 बजे तक बंद रहेंगे।

डीपीडीए के अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने कहा, केंद्र सरकार ने चार सितंबर को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क सहित 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। जिसके बाद पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों ने अपने वैट (मूल्य वर्धित कर) में भी इतनी ही कटौती कर जनता को पांच रुपये तक राहत दी थी।

उन्होंने कहा, “लेकिन दिल्ली सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने से इनकार कर दिया जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तुलना में ईंधन महंगा हो गया।”

सिंघानिया ने कहा कि दिल्ली में ईंधन महंगा और उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा जैसे राज्यों में सस्ता होने से ग्राहक वहां के पेट्रोल पंपों पर जा रहे हैं। इससे राजधानी के पेट्रोल पंपों की बिक्री में भारी गिरावट आयी है।

पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन की घोषणा

यूनियन ओला-उबर, केन्द्र व दिल्ली सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। उधर पेट्रोल-डीजल पर वैट कम नहीं करने पर दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने भी 24 घंटे के लिए पंप बंद रखने की घोषणा कर दी है। वेतन विसंगतियों सहित कई मांगों को लेकर डीटीसी कर्मियों की हड़ताल ने आम आदमियों की मुसीबत और बढ़ाएगी। इन सबके बावजूद लोगों की परिवहन सुविधाओं का ख्याल रखते हुए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए हैं।

संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उनकी मांग है कि दिल्ली में एक फिटनेस पिट केन्द्र बनाया जाए, जहां सभी उचित व्यवस्था हो, पूछो एप को तुरंत सक्रिय रूप से चालू किया जाए। चार सालों से निलंबित ऑटो वेलफेयर बोर्ड का गठन तत्काल स्तर पर किया जाए। सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया चालकों को मिलें, ओला-उबर एग्रीगेटर एप कंपनियों का एप्लिकेशन सरकार से प्रमाणित हो।

ओला-उबर लीजिंग के नाम पर कंपनी चालकों को लूटना बंद करें, लीज की गाड़ियां चालकों के नाम करें। ड्राइवर की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार लें, यात्रियों का केवाईसी करवाएं। स्पीड गवर्नर सरकार या गाड़ियों की कंपनियां लगवा कर दें।

डीटीसी कर्मचारी करेंगे नमक-रोटी धरना-प्रदर्शन

धरने के दौरान डीटीसी बसों का सड़कों पर टोटा हो सकता है, जिस कारण यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों ने चेताया है कि धरने के प्रभाव से उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वे 29 अक्तूबर को हड़ताल करेंगे। डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर के अध्यक्ष संतोष राय ने बताया कि धरना प्रदर्शन आईपी डिपो स्थित डीटीसी मुख्यालय के बाहर होगा।

कर्मचारियों की मांग है कि उनके वेतन में की गई कटौती के सर्कुलर को वापस लिया जाए और काटे गए वेतन को दिया जाए। समान काम के लिए समान वेतन अविलंब लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी डीटीसी प्रबंधन और सरकार से लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए डीटीसी कर्मचारी काम की छुट्टी करेंगे। फिर भी प्रशासन ने मांगे नहीं मानीं तो 29 अक्तूबर को कर्मचारी डीटीसी मुख्यालय के बाहर हर तरीके से काम की हड़ताल करेंगे और बसों को सड़कों पर नहीं उतरने देंगे।

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