छत्तीसगढ़

41वां रावत नाचा महोत्सव, गड़वाबाजा की धुन पर थिरकते हुए करते है शौर्य प्रदर्शन

अंचल में लगभग एक पखवाड़े से चल रहे रावत नाच महोत्सव का समापन हुआ।

भक्तिभाव, सामाजिक जागरूता के संदेश, आशीषों से सजे दोहे व गीतों के साथ पूरी रात लोककला की सतरंगी छटा सजती रही।

वहीं यदुवंशी पारंपरिक वेषभूषा में गड़वाबाजा की धुन पर थिरकते हुए शौर्य का प्रदर्शन करते रहे। पूरी रात शास्त्री मैदान में लोगों का जमघट रहा।

शनिवार को रावत नाच महोत्सव समिति की ओर से लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में 41वां महोत्सव हुआ। साथ ही अंचल में लगभग एक पखवाड़े से चल रहे रावत नाच महोत्सव का समापन हुआ।

इस अवसर पर पूरी रात गड़वाबाजा, टिमकी, सिंगबाजा, ढोलक, गड़वाबाजा, मोहरी, डफड़ा की धुन गूंजती रही। साथ ही यदुवंशी थिरकते हुए अपनी कला की प्रस्तुति दी।

वहीं बीच-बीच में दोहे गाकर शुभाशीष देते रहे। इससे पूरी रात आयोजन स्थल में मेले जैसा माहौल रहा।

रावत नाच महोत्सव में सजी आकर्षक झांकियां और गीतों के साथ पारंपरिक लोकनृत्य का आनंद लेने लोगों ने भी रतजगा किया।

जैसे-जैसे रात गहराती गई वैसे-वैसे लोगों की भीड़ भी बढ़ती गई। वहीं मौसम में घुलती ठंड भी लोगों के साथ ही यदुवंशियों का उत्साह कम नहीं कर सकी। लोगों ने उपस्थित होकर उनका हौसला बढ़ाया।

100 फीट के घेरे में रातभर नाचते रहे नर्तक

देर शाम से शुरू हुआ प्रस्तुति का सिलसिला पूरी रात चलता रहा। यदुवंशी प्रस्तुति देने के लिए बने सौ फीट के घेर में अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों को रोमांचित करते रहे।

इसमें सौ से भी ज्यादा दलों के नर्तकों ने अपने-अपने दल के साथ प्रस्तुति दी। उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी पारंपरिक वेशभूषा में सजे आकर्षण का केंद्र रहे।

इस अवसर पर एक के बाद दूसरी प्रस्तुति के लिए दलों को लंबा इंतजार भी करना पड़ा। फिर भी वे अपने वादक दल के साथ उत्साह के साथ नाचते-गाते अपनी प्रस्तुति का इंतजार करते रहे।

जैसे-जैसे उनका इंतजार खत्म होता गया वैसे-वैसे वे अपनी प्रस्तुति से सभी को लुभाते रहे।

झांकियों में सजी कृष्ण भक्ति

यदुवंशी अपने साथ झांकियां भी लाए थे। इसमें कृष्ण भक्ति के रंग सजते रहे। वहीं कुछ झांकियों के माध्यम से सामाजिक चेतना भी जागृत करते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

कृष्ण लीला, माखन चोरी, मटकी फोड़, कालिया नाग मर्दन समेत अनेक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वे झांकियों के साथ ही अपने-अपने बैनर के साथ अपना परिचय भी अनोखे और प्रभावी ढंग से देते रहे।

किया शौर्य प्रदर्शन

लट्ठ संचालन से यदुवंशी शौर्य प्रदर्शन करते रहे। इसमें उनके बीच का तालमेल और प्रर्दशन की कला देखते ही बन रही थी।

उनके लठ्ठ संचालन की कला ने सभी को रोमांचित किया। बड़ों के साथ ही दल में शामिल बच्चों का प्रदर्शन भी देखते ही बन रहा था।

इस मापदंड में परखा

पारंपरिक वेशभूषा, अनुशासन, प्रस्तुति, बाजा, लट्ठ संचालन, गुस्र्द चालन व झांकियों के आधार पर दलों को परखा समिति का निर्णायक दल इन्हीं आधार पर विजेता का चयन करेंगे।

महोत्सव में समाज की पत्रिका मड़ई का विमोचन किया गया। इसमें सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ ही संस्कृति पर शोधपरक रचनाएं होती हैं।

 

Summary
Review Date
Reviewed Item
41वां रावत नाचा महोत्सव, गड़वाबाजा की धुन पर थिरकते हुए करते है शौर्य प्रदर्शन
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags