राष्ट्रीय

बदली 450 साल पुरानी परंपरा बनारस के इस अखाड़े जानें क्यों है चर्चा में

वाराणसी। वाराणसी के तुलसी अखाड़े से कई नामी पहलवान निकले हैं। यहां जय श्रीराम के उद्घोष के साथ पिछले करीब 450 सालों से पुरुष पहलवानी करते रहे हैं। मगर, संकट मोचन मंदिर ट्रस्ट ने अब इस अखाड़े की इस परंपरा को बदल दिया है।

इसी साल नागपंचमी के दिन लड़कियों को इस अखाडे़ में कुश्ती के गुर सीखने की इजाजत मिली है। दिवाली पर इस अखाड़े में महिलाओं की कुश्ती का प्रदर्शन किया जाएगा। तुलसी अखाड़े में कुश्ती की कलाबाजियां करना सीख रही पहलवान नंदिनी ने कहा कि पारंपरिक पहलवानों की ट्रेनिंग अखाड़े की मिट्टी को स्पर्श किए बिना पूरी नहीं होती है।

उन्होंने कहा कि हमें वे टेक्स्ट दिखाए गए, जिसमें लिखा था कि हनुमान जी ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की शपथ ली थी। कहा गया कि लड़कियां अपवित्र होती हैं और भगवान के लिए महिलाओं की मौजूदगी पाप होती है। मगर, इन्हीं भगवान ने हमें लड़ाई लड़ने के लिए शक्ति दी। नंदनी के साथ ही आस्था वर्मा भी यहां प्रैक्टिस कर रही हैं और दोनों ही स्टेट लेवल की खिलाड़ी हैं।

आस्था ने कहा कि हम मैट पर प्रैक्टिस करते थे क्योंकि सारा टेक्निक मैट का ही है। मगर, हम लोगों को ज्यादा ताकत के लिए अखाड़े की जरूरत थी, इसलिए हमारे कोच ने महंत जी से बात की और आखिर में हमें इसकी इजाजत मिल गई।

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450 साल पुरानी परंपरा
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