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464 सिगरेटों जितना धुआं एक पटाखे से निकलता है

गर आपको लगता है कि दिवाली के दौरान पटाखे जलाने से दिल्ली के प्रदूषण पर बहुत असर नहीं पड़ता है तो आप गलत हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल एक अकेले पटाखे से उतना प्रदूषण होता है जितना कि 464 सिगरेटों के निकले धुएं से. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, यह प्रदूषण स्तर तय सुरक्षा पैमानों से बहुत ज्यादा है.

दिवाली में आप सबने सांप की टिकिया वाले पटाखे जरूर जलाए होंगे. इस पटाखे को जलाने से करीब 500 सिगरेटों को जलाने के बराबर धुआं होता है.स्नेक टैबलेट, फुलझड़ी, अनार, चकरी से जितना प्रदूषण होता है, वह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तय सुरक्षा मानकों से 200 से 2000 गुना ज्यादा है.इस स्टडी में पाया गया कि सांप की टिकिया सबसे हानिकारक पटाखा है. इसके बाद लाड, फुलझड़ी, चकरी और अनार से प्रदूषण होता है.अगर सांप की टिकिया को 9 सेकेंड के लिए जलाया जाता है तो 464 सिगरेट के धुएं के बराबर प्रदूषण होता है. वहीं, 1000 पटाखे की लड़ियों को अगर 48 सेकेंड के लिए जलाया जाए तो इससे 277 सिगरट के बराबर धुआं होता है.

इन पटाखों को ऐसी विस्फोटक सामग्री से तैयार किया जाता है जिससे फेफड़ों पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है. इस प्रदूषक से ह्द्य की बीमारियां और श्वास संबंधी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है.

चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन की वैज्ञानिक स्नेहा लिमये बताती हैं, “अधिकतर बच्चे बहुत ही कम दूरी पर सांप और फुलझड़ी जैसे पटाखे जलाते हैं. इस दौरान बच्चे हानिकारक धुएं को श्वसन में अंदर ले लेते हैं. खतरनाक धुएं कण उनके फेफड़ों में पहुंच जाते हैं.”

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464 सिगरेटों
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