ज्योतिष

अपने पूर्व जन्म को जानना है तो इसे पूरा जरूर पढ़ें एक बार

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

कर्म ज्योतिष पूर्व जन्म से लाए गए क्रेडिट और डेबिट को दर्शाता है। कर्म ज्योतिष का उद्भव वैदिक ज्योतिष से हुआ है। इसे वेदों की एक छोटी शाखा भी कहा जा सकता है। यह हैरान कर देने वाला है कि हम जन्मपत्री के आधार पर अपने पूर्व जन्म को समझते हुए, वर्तमान जन्म के कर्मों में सुधार करें।

जन्मपत्री हमारे कर्मों का नक्शा है। जो हमारे जीवन के सबक, क्रेडिट और डेबिट, प्रवृत्तियों और संभावनाओं को दर्शाता है जिनके साथ हमें इस जीवन में काम करना है। यहां हम कर्म को तटस्थ रुप से देख सकते है। यहां हम कर्म को अच्छा या पूरा नहीं कह सकते। कर्म बस कर्म है।

पूर्व जन्म के अतीत से प्राप्त कर्म हमारे कार्यों का कुल योग है, जो हमारे वर्तमान पर प्रभाव डालेगा। कर्म ज्योतिष के माध्यम से हम कर्म विरासत और आत्मा के तरीकों को समझ सकते है। यह हमारी कार्यक्षमता और उद्देश्यों को भी स्पष्ट करता है।

सूर्य और चंद्र स्थित राशि

कर्म की कार्यप्रणाली और उसमें छुपे अर्थ को समझने के लिए सबसे पहले जन्मपत्री को समझना होगा। इसके पश्चात यह समझना होगा कि जन्मपत्री में सूर्य किस राशि में स्थित है। सूर्य हमारे स्व और कर्म का प्रतिनिधित्व करता है। स्वयं में आप कौन से गुणों का विकास कर रहे है, उन सभी का वर्णन भी सूर्य स्थिति राशि से किया जा सकता है।

जैसा की सर्वविदित है कि सूर्य हमारी आत्मा का काराक ग्रह है। हमारी आत्मा को जानने-समझने के लिए सूर्य को समझना आवश्यक है। इसे आंतरिक आत्मा का वाहन भी कहा जा सकता है।

आपकी जन्मपत्रिका में जन्मचंद्र की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि अतीत (पूर्व जन्म) में आप भावनात्मक रुप से किस प्रकार के थे, आपकी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं किस प्रकार की थी। इसके साथ ही चंद्र की स्थिति यह भी दर्शाती है कि आप आंतरिक रुप से क्या है। आप के अंदर किस प्रकार का व्यक्ति निवास करता है। यह सब चंद्र स्थिति से जाना जा सकता है।

जन्म से लेकर विकास तक की यात्रा
सूर्य-चंद्र मेष राशि स्थित

जीवन यात्रा को भचक्र की बारह राशियों की यात्रा से समझा जा सकता है। जैसे सूर्य यदि मेष राशि में गोचर कर रहा है तो यह व्यक्ति को आत्म उन्नति की ओर लेकर जाता है। ऐसा व्यक्ति स्वंकेंद्रित होकर कार्य करता है। वह बार बार आध्यात्मिक होने की चाह के लिए कार्य करता है। ऐसे में जातक स्वार्थी और अहंकारी भी हो जाता है।

मेष राशि में सूर्य की स्थिति वाला जातक कई बार आत्म-केंद्रित होने के बजाय ‘मैं’ के लिए कार्य करता है। अर्थात इस स्थिति में व्यक्ति अहंकारी भी हो जाता है। यह स्वयं को पहचानने और परखने की प्रक्रिया है। अहंकार और मैं की भावना सूर्य विकसित करता है।

मेष राशि में चंद्र हो तो व्यक्ति खुद को मुखर करता है, भावनात्मक जरुरतों को पूरा करने के तरीके खोजता है। चंद्र व्यक्ति में सात्विक ऊर्जा को व्यक्त करता है। चंद्र भौतिक शरीर और दुनिया को पंच इंद्रियों के साथ पहचानने की कला देता है। यह चंद्र का आध्यात्मिक आयाम है।

सूर्य-चंद्र वृषभ राशि स्थित

सूर्य वॄषभ राशि में स्थित होने पर किसी के साथ की जरुरत हो सकती है। भौतिक विषयों पर अधिक निर्भर नहीं रहेंगेफ़, पैसा या पद क्या चाहिए, यह निश्चित करता है। वृषभ राशि में चंद्रमा स्थित हो तो व्यक्ति पहले से ही स्वयं को अनंत आत्मकेंद्र में स्थापित किए हुए है और वहां सुरक्षित है।

इस स्थिति में व्यक्ति के चरों और कर्म, सुरक्षा और मूल्य जैसे भाव घूमते है। भौतिकवाद, भाव बोध और दुनिया में अपना स्थान खोजता है। ऐसा व्यक्ति कहीं का बिल्डर, पत्थर, भूमि का मालिक, वाहनों का डिलर या बैंकर भी हो सकता है।

सूर्य-चंद्र मिथुन राशि स्थित

सूर्य मिथुन राशि में स्थित हो तो व्यक्ति नई चुनौतियों की प्रतिक्षा कर रहा होता है। सूचनाओं को छोटे छोटे भागों में भेजना और एक नई सच्चाई तक पहुंचने के लिए अंतर्ग्यान की एक बड़ी छ्लांग लगाना, ऐसा व्यक्ति हर चीज में दिलचस्पी रखता है, दुनिया को समझने के लिए आत्मा कई रास्ते तलाशती है। चंद्र मिथुन राशि में हों तो व्यक्ति में भावनात्मकता अधिक होती है।

आप अपनी भावनाओं से संवाद करना जानते है। यहां कर्म सत्य बनाम धोखे के साथ किया जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति किसी से भी बात कर सकता है और इस वजह से बहुत से वाककर्म करता है। मिथुन राशि मुख्य रुप से शिक्षण और प्रकाशन के साथ जुड़ी हुई है। प्रसार और प्रचार के साथ जुड़ी हुई सभी जिग्यासायें इसके अंतर्गत आती है।

सूर्य-चंद्र कर्क राशि स्थित

सूर्य यदि कर्क राशि में स्थित हो तो व्यक्ति के आत्मा भावनाओं और पोषण का पता लगाती है। इसके लिए वह अपने परिवार, घर, और मातृत्व का प्रयोग करती है। यह एक गहरा और संवेदनशील रिश्ता जोड़ती है। यह काफी हद तक मूड़ी होता है। यहा कर्म चुनौती होता है। जीवन के भावनात्मक आयामों को अनुभव करना और समझना है।

अपने पूर्वजन्म के अतीत से आत्मा अपने परिवार को पहचानना शुरु करती है। कर्क राशि का चंद्र जन्मपत्री में हो तो व्यक्ति की आत्मा लोगों के कल्याण और भलाई के लिए कार्य करती है। यह काफी हद तक भोजन और पेय से जुड़ा हुआ होता है। जो किसी युग में रसोईया या सार्वजनिक सामाजिक कार्यकर्ता भी हो सकता है।

सूर्य-चंद्र सिंह राशि स्थित

सिंह राशि में सूर्य आत्मकारक होकर उस दुनिया पर अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार रहता है। यह एक रचनात्मकता है, यहां कर्मों का शक्ति और रचनात्मकता के साथ संबंध होता है। आध्यात्मिकता ऊर्जा की अभिव्यक्ति है। ऐसे व्यक्ति को तानाशाही के साथ जीना आता है।

अभिमान और अहंकार इनमें कूट कूट कर भरा होता है। सिंह राशि में चंद्र अपनी भावनात्मक शक्ति के लिए जाना जाता है। दिल से कैसे जीना है, लेकिन यहां भावनात्मक खेलों से बचने की आवश्यकता होती है जिन्हें व्यक्ति ने अपने अतीत से पकड़े हुआ है।

सूर्य-चंद्र सिंह कन्या स्थित

कन्या राशि में सूर्य स्थित हो तो आत्मा पूर्व जन्म की सेवाओं और भेदभाव के बारे में सीख रही है। कन्या राशि में चंद्र की स्थिति होने पर आत्मा ने ब्रह्मचर्य बनाम कामुकता के मुद्दे को पकड़ा हुआ होता है। यहां चंद्र व्यक्ति को अनंत संभावनाएं देता है, पूर्णता देता है। स्वयं को अति-महत्वपूर्ण समझता है और ऊंचे आदर्श स्थापित करता है।

यहां आत्मा का उद्देश्य कर्म है, यह ह्रदय से आने वाली निश्छल सेवा , यह अच्छा और वफादार होता है, नौकर, प्रकाशक, जीवन का क्लीनर और आयोजक है। यह संकेत देता है कि अतीत में बहुत खूबसूरत बातें हुई है। उसका पूर्वजन्म का अतीत बहुत अनाज, फसल और कन्याओं से संबंधित हो सकता है।

सूर्य-चंद्र सिंह तुला स्थित

तुला राशि में सूर्य स्थित हो तो आत्मा दूसरे के साथ संबंध बनाने के लिए प्रयासरत रहती है। तुला राशि में चंद्र आत्मा का पूर्व जन्म संबंधों के मुद्दों पर काम करने और जीवन को बेहतर बनाने में बिताया हुआ है, ऐसा समझना चाहिए। यहां आत्मा स्वयं का ही पार्टनर होती है।

इस स्थिति में चुनौती अपने आप को खोने से बचाने की होती है। यहां कर्म का उद्देश्य आंतरिक संतुलन और सामंजस्य स्थापित करना है। किसी से अपने रिश्ते को पूरा करना है। आत्मा का पूर्व जन्म कूट्नीति, बातचीत और डेकोरेटर और इंटीरियर से जुड़ा हो सकता है।

सूर्य-चंद्र सिंह वृश्चिक स्थित

जब सूर्य वृश्चिक राशि में स्थित हो तो आत्मा बहुत से अंधकारमय स्थानों का पता लगाने के लिए तैयार रहती है। यह माना जाता है कि जब चंद्र वृश्चिक राशि से होकर गुजरता है तो वह पीड़ा से गुजरता है। इतनी पीड़ा के साथ जीवित रहना उसके लिए सहज नहीं है।

यह जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म का संकेतक है और मानवता का छाया पक्ष है। इस आत्मा का कर्म उद्देश्य वहाँ की अंतर्दृष्टि को खोजना है जो अपने और दूसरे के उपचार को आगे बढ़ाएगा। यहां कर्म से अभिप्राय: शक्ति की प्राप्ति है और इसके दुर्पयोग से बचना है।

सूर्य-चंद्र सिंह धनु स्थित

धनु राशि में सूर्य की स्थिति से यह अभिप्राय है कि पूर्व जन्म के गहरे अर्थों की तलाश करता है। यहां एक आत्मा समझने की खोज पर अग्रसर होगी। यहां चुनौती यह है कि एक खोज को करते हुए जमीं से जुड़े रहना है, धनु राशि के व्यक्ति अक्सर अपने जीवन लक्ष्य को जानते नहीं है। धनु राशि में चंद्र बिना किसी प्रतिबद्धता और भावनात्मकता को जोड़ता है। यह संभव है कि पूर्व जन्म में आत्मा पुजारी, दार्शनिक, शिक्षक आदि हो सकता है।

सूर्य-चंद्र सिंह मकर स्थित

मकर राशि में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति पूर्व जन्म में बाहरी जीवन की स्थिरता और आंतरिक आध्यात्मिक को चुनौती देता है। यहां वह एक ऐसे अधिकार के लिए कार्य करता है जो आत्मा को संयमित किए हुए बिना, समाज में भाग लेने का प्रयास कर रही है। समाज की सीमाओं के भीतर रहना उसके लिए चुनौती होती है।

मकर राशि में चंद्र स्थित हो तो वह अक्सर प्रतिबंधित, भावनाओं से डरता है, भावनाओं को साझा करने से बचता है। यह एक संकेत है जो आत्मा को ज्ञान से फिर से जोड़ने और एक बुद्धिमान व्यक्ति बनने के लिए प्रयासरत रहता है।

सूर्य-चंद्र सिंह कुम्भ स्थित

जब एक आत्मा कुंभ राशि में सूर्य के साथ जन्म लेने का विकल्प चुनती है, तो वह क्रांति की तलाश कर रही होती है, इसे क्रमागत उन्नति का नाम दिया जा सकता है। मानवीय संकेत अधिक से अधिक देख सकता है और उस परिवर्तन को पहचान सकता है। यहां आत्मा और समाज को विकसित करना आवश्यक है।

कुंभ राशि में चंद्रमा स्थित हो तो व्यक्ति अकेला रहता है, भावनाओं से कट जाता है। कुम्भ राशि के लिए कर्म चुनौती सोच को मुक्त रखना और बिना अभिनय के रहना है। अन्यथा समाज को नष्ट करने के कार्य वह कर सकता है। यहां कर्म का उद्देश्य सीमाओं में एरहना, मानवता को लाभ पहुंचाना, असाधारण चुनौतियां रखने से बचना है।

सूर्य-चंद्र सिंह मीन स्थित

मीन का कर्म उद्देश्य आत्मज्ञान प्राप्त करना है। जब आत्मा मीन में प्रवेश करती है तो यह शाश्वत को स्थानांतरित करने का अवसर है। सूर्य मीन राशि में स्थित हो तो व्यक्ति की प्रवृत्ति प्रायश्चित की होती है।

चंद्रमा मीन राशि में स्थित होने पर आत्मा पूर्व जन्म में सज ज्ञान युक्त, अत्यधिक भावुक और महान अनुरक्षक के रूप में कार्य करती है। इसकी चुनौती दुनिया से भागना होती है। यह दुनिया एक भ्रम लगती है।

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