जिले के 547 हृदय रोग से ग्रसित बच्चों का किया गया उपचार

महासमुंद: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के समस्त शासकीय प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अनुदान प्राप्त स्कूलों तथा आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं तथा आंगनबाडी केन्द्रंांे में शून्य से 18 वर्ष के बालक-बालिकाओं को चिरायु टीम के माध्यम से निशुःल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता हैं। गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों को जांच एवं उपचार के लिए चिरायु दल द्वारा चिरायु वाहनों से चयनित निजी अस्पतालों में ले जाया जाता हैं।

इसी तारतम्य में आज 29 मार्च को जिला स्तरीय चिरायु दल डॉ देवेन्द्र साहू,(आयुष चिकित्सा अधिकारी) सुरेखा साहू (फार्मासिस्ट), लता साहू (एएनएम) के द्वारा 04 बच्चों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जांच के लिए नारायणा अस्पताल रायपुर एवं एमजीएम ऑई इंस्टिट्युट रायपुर ले जाया गया हैं। इनमें लक्ष्मीकांत डडसेना 16 वर्ष ग्राम बावनकेरा, निधी बरिहा 03 वर्ष वार्ड न.05, वैभवी ठाकुर 12 वर्ष केन्द्रीय विद्यालय महासमुन्द, जो कि ह्दय रोग से ग्रसित हैं।

जिन्हें नारायणा अस्पताल रायपुर ले जाया गया हैं। इसी प्रकार खुशबु साहू 10 माह गुरू घासीदास वार्ड, आंख की समस्या से ग्रसित है जिसे एमजीएम ऑई इंस्टिट्युट रायपुर ले जाया गया हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार द्वारा चिरायु दल से जानकारी ली गई एवं बच्चों के अभिभावकांे को ईलाज के संबंध में आश्वस्त किया गया। चिरायु दलों द्वारा कुल 32 बिमारियों की जांच की जाती हैं। जिनमें मुख्यतः गंभीर बीमारी जैसे-ह्दय रोग, जन्मजात मोतियाबिन्द, कटे-फटे होठ, टेडे-मेडे पैर शामिल हैं।

डॉ मुकुंद राव घोडेसवार जिला आरएमएनसीएचए सलाहकार द्वारा बताया गया कि जिले में यह कार्यक्रम अगस्त 2014 से संचालित किया जा रहा हैं। अगस्त 2014 से अब तक कुल 912 ह्दय रोग से ग्रसित बच्चों की पहचान की गई हैं। जिसमें से 547 बच्चों का सफलतापूर्वक ईलाज हो चुका हैं। इसी प्रकार कटे-फटे होठ के 108 मंे से 62, पैर की विकृति के 178 में से 62 एवं जन्मजात मोतियांबिन्द के 75 में से 44 बच्चो का ईलाज पूरा हो चुका हैं।

बाकी बचे हुए बच्चों के उपचार की कार्रवाई की जा रही हैं। इसके अलावा चिरायु दल में शामिल लैब तकनीशियन द्वारा सिकल सेल की जांच भी की जा रही हैं। जिसमें अब तक कुल एक लाख 5 हजार 496 बच्चों का सिकल सेल परीक्षण किया गया। जिनमें से 6 हजार 830 बच्चों में सिकल सेल पॉजीटिव पाया गया हैं।

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