चीन में बना दुनिया का 55 किमी लंबा समुद्री पुल, जानें खासियत

8 अरब डॉलर की लागत से बनकर तैयार हुआ यह पुल

चीन में बने दुनिया के सबसे लंबे समुद्री पुल पर जल्दी ही ट्रायल रन शुरू होने वाला है। 55 किलोमीटर लंबे हॉन्ग कॉन्ग-झूहाई-मकाऊ ब्रिज पर 2011 में काम शुरू हुआ था।

8 अरब डॉलर की लागत से बने इस पुल पर पिछले साल ही काम पूरा हुआ है। लेकिन, फीडर रूटों पर काम के चलते यह खाली पड़ा था और इसका ट्रायल रन शुरू नहीं हुआ था।

यह पुल बेहद खास है। इसमें केबल ब्रिज, अंडरसी टनल और आर्टिफिशल आइलैंड समेत कई खास चीजें तैयार की गई हैं, जो इंजिनियरिंग का बेहतरीन नमूना हैं।

इसके ट्रायल रन के झूहाई, मकाऊ और हॉन्ग कॉन्ग अपने-अपने 40 वाहनों को रवाना करेंगे। तीन दिनों तक यह ट्रायल रन होगा। यदि सब कुछ सही रहता है तो फिर पुल को अगले महीने खोला जा सकता है।

मकाऊ, हॉन्ग कॉन्ग और झूहाई को जोड़ेगा

यह कोई छोटा प्रॉजेक्ट नहीं है। इस पुल के जरिए इंडस्ट्रियल सिटी मकाऊ, हॉन्ग कॉन्ग के कमर्शल स्टेट और चीन के मैन्युफैक्चरिंग हब कहे जाने वाले झूहाई को जोड़ा गया है।

झूहाई गुआंगडोंग सूबे में लगता है। इस सूबे में ही शेनझेन शहर भी है, जिसे हार्डवेअर का सिलिकॉन वैली कहा जाता है।

हॉन्कॉन्ग से कनेक्टिविटी

इस पुल का कारोबार के साथ ही रणनीतिक महत्व भी बहुत अधिक है। हॉन्ग कॉन्ग खुद को अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र वाला देश बताता रहा है। लेकिन, वह स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है, वह चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के दायरे में है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण

कागजी तौर पर चीन यह कहता है कि उसका हॉन्ग कॉन्ग के अंदरुनी मामलों में दखल नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। इस पुल के जरिए उसकी हॉन्ग कॉन्ग तक पहुंच बेहद आसान होगी।

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