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अगर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बची है तो ये वसुंधरा राजे की कोशिश: सांसद हनुमान बेनीवाल

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर लगाया सनसनीखेज आरोप

जयपुर: राजस्थान के बड़े नेताओं में से एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी ही सहयोगी पार्टी बीजेपी की वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं.

सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि अगर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बची है तो ये अशोक गहलोत के साथ वसुंधरा राजे की भी कोशिश है. वसुंधरा राजे ने अशोक गहलोत के साथ मिलकर सरकार को बचाया. उनके मुताबिक यहां तक कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने मनाने के लिए कांग्रेस विधायकों को फोन तक किए.

हनुमान बेनीवाल के आरोप के बाद बीजेपी में सनसनी

सांसद हनुमान बेनीवाल केंद्र में बीजेपी का समर्थन कर रहे है. उनकी पार्टी एनडीए में शामिल है. हनुमान बेनीवाल के इस आरोप के बाद बीजेपी में सनसनी फैल गई है. हनुमान बेनीवाल ने इस मामले को लेकर ट्वीट भी किया है.

ट्वीट में उन्होंने कहा कि राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गठजोड़ जनता के सामने खुलकर आ गया है. दोनों ने मिलकर एक दूसरे के शासन में दोनों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला है.

उन्होंने खुलकर कहा कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अशोक गहलोत की अल्पमत वाली सरकार को बचाने का पुरजोर प्रयास किया और अभी भी कर रही हैं. प्रदेश व देश की जनता वसुंधरा-गहलोत के आंतरिक गठजोड़ की कहानी को समझ चुकी है.

सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि राजस्थान में सरकार के मंत्री व सत्ता पक्ष के कई विधायक सीएम अशोक गहलोत की बाड़ेबंदी में कैद है. कांग्रेस के शासन से जनता त्रस्त है, किसान टिड्डी से परेशान हो रहे हैं. लोगों के काम नहीं हो रहे हैं. यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है, जिसके जिम्मेदार स्वयं गहलोत है.

उन्होंने यह भी कहा कि अल्पमत के कारण अशोक गहलोत ने अपने अवसाद को मीडिया पर थोप रहे है. बेहतर होगा कि वो अपने स्वास्थ्य को मद्देनज़र रखते हुए लोकतंत्र के सम्मान में स्वयं आगे आकर सीएम पद से त्याग पत्र दे दें.

आज एक बार फिर इस मामले की सुनवाई

उधर जयपुर हाईकोर्ट में गहलोत सरकार के नोटिस को लेकर सत्ता पक्ष और बागी सचिन पायलट गुट की याचिका पर प्राथमिक सुनवाई हो चुकी है. आज एक बार फिर इस मामले की सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे ने कहा था कि सदन से बाहर की कार्यवाही के लिए विधानसभा अध्यक्ष नोटिस जारी नहीं कर सकते. नोटिस की संवैधानिक वैधता नहीं है.

नोटिस को तुरंत रद्द कर इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए. दूसरी तरफ कांग्रेस ने सचिन पायलट और उनके समर्थक 18 अन्य विधायकों के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा है कि इन्होंने व्हिप की अवहेलना की थी. कहा जाता है कि इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला सचिन पायलट की अगली राह को निर्धारित करेगा.

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