उत्तर प्रदेश

किन्नर अखाड़ा में 60 और ट्रांसजेंडर्स बने संन्यासी

दूसरों संतों के बीच पहचान न मिलने और बहिष्कार होने पर 60 ट्रांसजेंडर्स संन्यासी हो गए। वे हाल ही में बने नए मठ किन्नर अखाड़ा में शामिल हुए हैं। यह अखाड़ा अलोबी बाग आश्रम (इलाहाबाद) में है।

इन संन्यासियों के लिए वैदिक संस्कार करने की जिम्मेदारी स्वामी वासुदेवानंद ने निभाई। किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए 60 ट्रांसजेंडर्स ने संन्यासी का वेश धारण किया। उन्होंने वे सारे वैदिक संस्कार किए जो एक आम संन्यासी करता है।

इस नए बने किन्नर अखाड़े का बहिष्कार अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने किया था। शताब्दियों पुराने 13 अखाड़ों के प्रमुखों ने उनका विरोध किया। वैसे भी किन्नरों को सभी प्रतिष्ठिक संतों के बीच और दूसरे मठों के कार्यक्रमों में बुलाया जाता है, लेकिन वे अब खुद उनके कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते हैं।

नए किन्नरों को संत बनाने के लिए सारी प्रक्रियाएं की गईं। उनके पद और टाइटल भी निर्धारित किए गए। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नरों का तपस्वी जीवन उनके लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद दूसरा क्रांतिकारी फैसला है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके समुदाय को थर्ड जेंडर बनाए जाने का फैसला किया था।

लक्ष्मी नारायण ने बताया कि 13 अखाड़ों के संत समुदाय पुरुष प्रधान हैं। उन्होंने यह कहकर उन्हें अखाड़े में शामिल करने से मना कर दिया था कि हिंदू धर्म इसे स्वीकार नहीं करता। अखाड़े के ऐसा कहने के बाद उन लोगों ने फैसला किया कि वे अपना अलग अखाड़ा बनाएंगे।

उन्होंने बताया कि किन्नर अखाड़ा किन्नरों की समाज में शादी-ब्याह और जन्मदिन समारोह में नाचने-गाने, ट्रैफिक सिग्नल और ट्रेनों में रुपये मांगने वाली उनकी छवि को सुधारेगा।

महंत पवित्र ने बताया कि पुराण जैसे धार्मिक ग्रांथों में किन्नरों के हर क्षेत्र में सहयोग करने और उनकी प्रशंसा का उल्लेख है। उन लोगों को वेद पुराणों में संदर्भित किया गया है। एक इंसान होने के नाते उन्हें भी समाज की सेवा करने का अधिकार है। अब दूसरे संत उन्हें स्वीकार करें या न करें, वे लोग उनके प्रयास को जारी रखेंगे।

पुराणों में जो श्री विद्या संस्कार दिया गया है, किन्नर उसका पालन करेंगे। मठ में उनके गुरु उन्हें दीक्षा और मंत्र देंगे। किन्नर अखाड़ा ने प्रशासन से 2018-19 में होने वाले अर्ध कुंभ के माघ मेला में उनके अखाड़े को अलग जगह देने का आवेदन किया है।

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