66 साल पहले स्व. कश्यप ने देखा था छत्तीसगढ़ राज्य का सपना

पूर्व राज्यसभा सदस्य व अकलतरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामधार कश्यप की छत्तीसगढ़ की माटी से लगाव ऐसा कि आज से 66 साल पहले जब मध्य प्रदेश का गठन नहीं हुआ था

ब्यूरो चीफ विपुल मिश्रा
बिलासपुर : पूर्व राज्यसभा सदस्य व अकलतरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामधार कश्यप की छत्तीसगढ़ की माटी से लगाव ऐसा कि आज से 66 साल पहले जब मध्य प्रदेश का गठन नहीं हुआ था और संपूर्ण मध्यभारत सीपी एंड बरार के अंतर्गत था उस दौर में वर्ष 1955 में खूबचंद बघेल के नेतृत्व में नागपुर में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण को लेकर पर्चा फेंका था।

पर्चा फेंकने के बाद बघेल व कश्यप मध्यभारत की राजनीति में एकाएक छा गए थे। यह वही दौर था जब सीपी एंड बरार का विभाजन कर मध्य प्रदेश्ा राज्य गठन की प्रक्रिया को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई थी। नए बनने वाले राज्य मध्य प्रदेश के नक्शे में छत्तीसगढ़ की सीमाओं को भी शामिल किया गया था। उस समय खूबचंद बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भातृ संघ का गठन किया गया था। बघेल को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी

बघेल ने अपने विश्वसनीय साथी के रूप में स्व. कश्यप को महामंत्री की जिम्मेदारी दी थी। स्व. कश्यप ने अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ियों के मन मंे अलख जगाने का काम किया। लोगों के मन में छत्तीसगढ़िया का भाव जगाने वाले स्व कश्यप ही थे। उनका जन्म 26 नवंबर 1938 को चोरभट्ठी अकलतरा के एक संपन्न् कृषक परिवार में हुआ था

प्रारंभिक शिक्षा मिशन स्कूल में और उच्च शिक्षा सीएमडी कालेज में हुई। एलएलबी की उपाधि लेने के बाद इंकम टैक्स वकील बन गए। सामाजिक सरोकार और राजनीति के प्रति स्र्झान के चलते उन्होंने सार्वजनिक जीवन जीने का निर्णय लिया। कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी थे। माउथ आर्गन बजाने में उनकी कोई सानी नहीं थी। संगीत के प्रति गहरी रुचि रखते थे।

स्व. जोगी के करीबी रहे कश्यप

स्व कश्यप पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के करीबियों में से थे। स्व. जोगी उनकी बातों पर सहजता के साथ भरोसा करते थे। छत्तीसगढ़ में ओबीसी राजनीति को दिशा देने खासकर बिलासपुर संभाग से प्रदेश की ओबीसी राजनीति की अगुवाई को लेकर उन्होंने स्व. कश्यप को राजनीतिक रूप से महत्व देना शुरू किया

वर्ष 2002 में राज्यसभा की टिकट दिलाए और राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित कराने में स्व. जोगी की अहम भूमिका रही। राज्यसभा सदस्य रहते वर्ष 2003 में अकलतरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते भी। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। एसईसीएल में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले इसके लिए राज्यसभा सदस्य रहते प्रबंधन के खिलाफ विरोध का मोर्चा खोल दिया था..

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