छत्तीसगढ़

बेरोजगार युवकों को नौकरी लगाने का झांसा देकर 7 लाख की धोखाधड़ी

बिलासपुर। खुद को ट्रांसपोर्टर व प्रॉपर्टी डीलर बताकर बेरोजगार युवकों को नौकरी लगाने का झांसा देकर ठगी करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने एक ग्रामीण युवक को फूड इंस्पेक्टर बनाने के नाम पर सात लाख रुपये ठगे थे। आरोपित युवक दो साल से फरार था और अभी धमतरी स्थित अपने ससुराल में छिपा था।

सिविल लाइन सीएसपी एसएस पैकरा व थाना प्रभारी कलीम खान ने बताया कि हिर्री क्षेत्र के मोहदा निवासी संतराम साहू पिता ताजन साहू (42) खेती-किसानी करता है। उसके परिचित का व्यक्ति रायपुर स्थित राजभवन में पदस्थ है। उसके माध्यम से रायपुर के अभनपुर के उल्बा निवासी योगेश सोनवानी पिता खोनेश्वर सोनवानी (38) से मुलाकात हुई।

उसने खुद को एसके टूरिज्म बस सर्विस का डायरेक्टर व प्रॉपर्टी डीलर बताकर अपनी ऊंची पहुंच होने की धौंस दिखाई। बातचीत में उसने बताया कि मंत्रालय में भी उसकी जान-पहचान है और किसी की भी बेरोजगार को सरकारी विभाग में नौकरी लगा सकता है।

ग्रामीण उसकी बातों में आ गया। योगेश ने उसे फूड इंस्पेक्टर बनाने का झांसा दिया। इसके लिए उसने सात लाख रुपये की मांग की। इस पर ग्रामीण ने उसे व्यापार विहार स्थित आइसीआइसीआइ बैंक के माध्यम से चार लाख रुपये दिए। फिर बाद में तीन लाख रुपये नकद भी दे दिए। लेकिन, इसके बाद से न तो उसकी नौकरी लगी और न ही उसने रकम वापस की। इस बीच नौकरी नहीं मिलने पर रकम वापसी के लिए वह लगातार चक्कर लगाता रहा।

लेकिन, बाद में योगेश ने उसका फोन उठाना भी बंद कर दिया। तब उसने धोखाधड़ी की शिकायत सिविल लाइन थाने में की। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया। इसके बाद से आरोपित युवक की तलाश की जाती रही। वहीं आरोपित युवक दो साल तक फरार रहा।

टीआइ कलीम खान ने इस मामले की डायरी का परीक्षण किया, तब आरोपित के फरार होने की जानकारी मिली। लिहाजा, उन्होंने दोबारा पतासाजी शुरू कर दी। पता चला कि वह धमतरी स्थित अपने ससुराल में छिपा है। लिहाजा, पुलिस की टीम भेजकर उन्होंने पकड़ने के निर्देश दिए। आखिरकार इस बार सफलता मिल गई और धोखाधड़ी का आरोपित युवक गिरफ्तार कर लिया गया।

एफआइआर होने के बाद लौटाए चार लाख रुपए

टीआइ खान ने बताया कि पीड़ित ग्रामीण ने पुलिस को बताया था कि आरोपित के खिलाफ थाने में एफआइआर दर्ज होने के बाद वह रकम लौटाने के लिए संपर्क किया। इस दौरान उसने चार लाख रुपये लौटा दिए। लेकिन, शेष रकम देने के लिए टालमटोल करता रहा।

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