70 लाख मोबाइल नंबर देश के लिए खतरा

70 लाख मोबाइल नंबर देश के लिए खतरा

एमपी एटीएस के खुलासे क बाद 70 लाख मोबाइल फोन नंबर देश की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बन गए हैं. ये वो नंबर हैं, जिनका इस्तेमाल समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज को चलाने के लिए किया जा रहा है.

समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए देश की गोपनीय जानकारियों की जासूसी करने का खुलासा पहले ही हो चुका है. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नंबरों के सामने आने के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसी भी सतर्क हो गई हैं.

नौ महीने पहले एटीएस की गिरफ्त में आए पाकिस्तानी जासूसों से पूछताछ में मिले इनपुट के बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई. एटीएस ने आगे की कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है.

दरअसल, एमपी एटीएस ने फरवरी में नियम विरुद्ध समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले पाकिस्तानी जासूसों को प्रदेशभर से गिरफ्तार किया था. एटीएस ने ये कार्रवाई जम्मू कश्मीर से मिले इनपुट के बाद की थी.

आरोपी अवैध टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी भेजते थे. सभी आरोपी सेंट्रल जेल में बंद है. एटीएस आज भी इस मामले की जांच कर रही है.

बीते दिनों एटीएस ने जासूसों से पूछताछ में मिले इनपुट के बाद दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की. एटीएस ने देशभर में अवैध एक्सचेंज में इस्तेमाल किए जा रहे उन 70 लाख नंबरों का खुलासा किया, जिसके जरिए पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से बातचीत कर भारत की गोपनीय जानकारियों भेजी जा रही है.

एमपी में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का नेटवर्क ध्वस्त करने के बाद 70 लाख नंबर देश की दूसरे राज्यों में संचालित हो रहे हैं. एटीएस की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियां के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय भी सतर्क हो गया है.

एटीएस का दावा है कि अगर उनके इनपुट पर गंभीर कार्रवाई नहीं हुई तो देश के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है. एटीएस को उम्मीद नहीं थी कि संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त नंबरों का आंकड़ा 70 लाख पहुंचेगा. सबसे खास बात ये है कि इन नंबरों में सभी टेलीकॉम कंपनियों की सिम कार्ड हैं.

एटीएस के इस खुलासे के बाद औऱ ज्यादा सतर्कता की जरूरत है, क्योंकि देश में आतंकियों का मूवमेंट बढ़ा है. एमपी में आतंकी संगठन सिमी ,तो उत्तरप्रदेश के बाद गुजरात में भी आतंकी संगठन पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं. इन नंबरों के जरिए भारत की गोपनीय जानकारी दूसरे देशों में भेजी जा रही है. ऐसे में आतंकी संगठन इन नंबरों को अपना बड़ा हथियार बना सकते हैं.

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