डीकेएस में आउटसोर्स पर रहे 84 सुरक्षाकर्मी, 60 एमआरडी को किया बाहर

रायपुर। दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल से पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता को हटाने के बाद आउट सोर्सिंग सबसे बड़ा मुद्दा बना। आकलन किया गया तो अलग-अलग कंपनियों को 4.50 करोड़ रुपये का भुगतान होना पाया गया।

इसमें पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, सिक्योरिटी, मेडिकल स्टोर, लांड्री, डायलिसिस जैसी प्रमुख सेवाएं शामिल हैं। इसके बाद तय हुआ कि सभी में कटौती करनी है, इसकी प्रक्रिया फरवरी में ही शुरू हो गई थी। सभी एजेंसियों को नोटिस जारी कर कहा गया कि वे अपने स्टाफ में स्वतः कटौती करना शुरू करें।

अब एमआरडी शाखा में आउटसोर्स पर रहे 60 कर्मचारियों को निकालने का फैसला लिया गया है। इस शाखा में पहले से ही सरकारी कर्मचारी सेवारत हैं। डॉ. केके सहारे का कहना है कि हर महीने समीक्षा की जा रही है कि कहां पर कितने कर्मचारियों की आवश्यकता है,उसके हिसाब से ही छंटनी की जाएगी। हाउस कीपिंग,ऑफिस बॉयज, डिलीवरी बॉयज को भी निकालने की तैयारी है। स्पष्ट कर दें कि अस्पताल को भविष्य में खुद को इस रूप में स्थापित करने के निर्देश हैं कि वह राजस्व जनरेट करे और उससे ही अस्पताल का संचालन करे।

इसके लिए मांगा गया है अतिरिक्त बजट

अस्पताल में माननीयों (मंत्री, सांसद, विधायकों) के हस्ताक्षर वाले पत्रों (लेटर हेड) पर मुफ्त इलाज आज भी हो रहा है। 28 फरवरी को जब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिहंदेव अस्पताल आए थे, तब डीकेएस प्रबंधन ने यह मुद्दा उठाया था। कहा था कि रोजाना 150 से अधिक मरीज पत्र लेकर आते हैं। उनके इलाज में 7.50 लाख रुपये खर्च होता है। उस समय मंत्री ने कहा था कि यह समस्या यूनिवर्सल हेल्थ केयर के जरिए खत्म हो जाएगी।

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