प्रदेश भर के 85 जेल बंदियों को अपनी रिहाई का इंतजार

रायपुर।

प्रदेश भर के 85 जेल बंदियों को अपनी रिहाई का इंतजार है। दरअसल ये वे बंदी हैं, जिन्होंने अपनी जुर्म की कोर्ट से सुनाई गई सजा पूरी भुगत ली है, लेकिन उनकी रिहाई का फैसला कानूनी पेंच में फंसकर रह गया है। बावजूद इसके बंदियों के परिजनों को उम्मीद है कि देर-सवेर रिहाई जरूर हो जाएगी।

ऐसे ही छह बंदी रायपुर सेंट्रल जेल में अपनी रिहाई की राह ताक रहे हैं। पिछले दो साल से इनकी रिहाई का मामला कोर्ट और गृह विभाग के बीच पेंच में फंसने से अटका हुआ है। जेल प्रशासन ने इन बंदियों की रिहाई की कवायद एक बार फिर से तेज की है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा।

जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के जेलों में अपने जुर्मों की सजा काट रहे 85 जेल बंदियों में से 27 बंदियों की रिहाई दो अक्टूबर तक करने के लिए जेल प्रशासन ने एक बार फिर से कवायद तेज की है। इनमें से अकेले छह बंदी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है।

इन बंदियों को सालभर में तीन बार 26 जनवरी, 15 अगस्त और 18 दिसम्बर (गुरु घासीदास जयंती) पर सजामाफी और रिहाई की सौगात मिलती है। लेकिन पिछले दो साल से बंदि को माफ करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाता था।

राज्य शासन के आदेश पर सजायाफ्ता बंदियों को सजा में छूट के प्रावधान का लाभ देकर रिहा किया जाता था, लेकिन तमिलनाडु सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे श्रीहरण उर्फ मुरुगन को रिहा करने के आदेश पर दायर एक याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। तब से मामला गृह विभाग और कोर्ट के बीच पेंच में फंस गया है।

सुप्रीम कोर्ट का ये है निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को आदेश जारी कर हत्या समेत अन्य गंभीर मामलों के आरोपितों की सीधी रिहाई पर रोक लगाते हुए गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत सजा सुनाने वाली अदालत के अभिमत व राज्य शासन की कमेटी के निर्णय के बाद ही रिहाई का आदेश है। इसके बाद से संबंधित कोर्ट से अभिमत लेने के बाद ही कमेटी को प्रस्ताव भेजा जाता है।

सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग ने जेल प्रशासन ने 85 बंदियों की सूची बनाकर शासन को भेजा था, इनमें से 27 बंदियों की रिहाई को लेकर संबंधित कोर्ट से अभिमत मांगा था। कोर्ट ने बंदियों की रिहाई पर आपत्ति नहीं जताई परंतु स्पष्ट अभिमत न देकर लिखकर भेज दिया कि सरकार चाहे तो किसी भी बंदी को रिहा कर सकता है।

लिहाजा कोर्ट का स्पष्ट अभिमत नहीं मिलने की वजह से बंदियों की रिहाई की फाइल अटकी हुई है। रायपुर सेंट्रल जेल में हत्या समेत अन्य प्रकरणों के कई बंदी दो साल पहले ही 14 से 18 साल की सजा काट चुके हैं, परंतु इनकी रिहाई नहीं हो पाई है। इन बंदियों में चमनलाल, दौलत राम, कंचन घोष, राजेश कुमार, सनद कुमार साहू, संतराम, परदेशी, मंशाराम, रज्जाक खान, रामस्वरूप, अजयराम और टेकराम शामिल हैं।

– हत्या समेत अन्य गंभीर प्रकरणों के 27 बंदियों की रिहाई का मामला शासन स्तर पर कोर्ट से स्पष्ट अभिमत नहीं मिलने की वजह से लंबित है। जेल प्रशासन ने बंदियों की रिहाई की कवायद तेज की है। कोर्ट से निर्देश प्राप्त होते ही रिहाई की जाएगी। – केके गुप्ता, डीआईजी जेल

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