छत्तीसगढ़

देश के मनोविज्ञान के 872 शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहा विश्वविद्यालय

रायपुर।

पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में देशभर के 872 शिक्षकों को शैक्षणिक गतिविधियों में पारंगत बनाया जा रहा है। मनोविज्ञान विभाग में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की ओर से विवि को एनआरसी (नेशनल रिसोर्स सेंटर) के तहत चयन के बाद 15 नवम्बर से इसकी शुरुआत की गई है।

इसके तहत विवि के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एमएचआरडी के निर्देशानुसार एनुअल रिफ्रेशर प्रोग्राम इन टीचिंग की जिम्मेदारी दी गई है। जिसके तहत स्वयं पोर्टल पर हर हफ्ते चार वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं, जिसमें अलग-अलग टॉपिक पर आधे घंटे के व्याख्यान के साथ क्लिपआर्ट सहित अन्य आवश्यक कंटेंट भी अपलोड किए जा रहे हैं। साथ ही इन शिक्षकों ने कब-कब इन वीडियो का लाभ उठाया और कितने देर तक इन्हें देखा, इसकी मानिटरिंग भी की जा रही है। एनआरसी की को-ऑर्डिनेटर और मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. प्रमिला सिंह ने बताया कि सारे शिक्षकों के कांटेक्ट और इ-मेल प्राप्त किए जा चुके हैं। इसकी अगली कड़ी में शिक्षकों को एसाइनमेंट देने के साथ उनकी परीक्षा ली जाएगी।

प्रमोशन में लाभ

एनआरसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. प्रमिला ने बताया कि रविवि को सिर्फ मनोविज्ञान से संबंधित विषय के लिए चुना गया है। जिसमें पहली बार में ही 872 शिक्षकों का पंजीकृत होना बड़ी उपलब्धि है। साथ ही 40 घंटे के इस कोर्स को करने के बाद शिक्षकों को एकैडमिक गतिविधियों के साथ होने वाले विभागीय प्रमोशन में भी लाभ मिलेगा।

बच रही छुट्टियां और समय

आधुनिक तकनीकों के उपयोग से शिक्षकों का समय और छुट्टियां दोनों ही बच रही हैं। इससे पूर्व शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए 21 दिन का समय देना पड़ता था। नई पद्धति से शुरू किए गए 40 घंटे के कोर्स से शिक्षक कहीं भी बैठे-बैठे सुविधा के हिसाब से इनका उपयोग कर सकते हैं।

Back to top button