छत्तीसगढ़

बच्चा चोर के अफवाह मे एक दिमागी मरीज आया पुलिस की गिरफ्त मे

योगेश केशरवानी:

बिलाईगढ़: बलौदाबाजार जिला सहित कई ब्लॉकों में लगातार बच्चा चोर गिरोह का सक्रिय होने का अफवाह के बाद मानसिक रूप से कमजोर व दिमागी मरीज के लोग अक्सर गाँव कस्बो व बस स्टैंडों में घूमते नजर आ रहे है जो बच्चा चोर का शिकार बन रहे है।

दरसल ताजा मामला बिलाईगढ़ थाना क्षेत्र के बाँस उरकुली में देखने को मिला, जहाँ एक बच्ची रोड किनारे खेल रही थी , उसी समय एक छुब्ध व्यक्ति, खेल रही बच्ची को अपने पास बुलाया और कॉलेज के मैदान में जाने कहाँ बच्ची डर से पड़ोस के रिश्तेदार को बताया।

कुछ लोगों की मदद से थाना पकड़कर लाया

परिजन तत्काल छुब्ध व्यक्ति को बच्चा चोर होने के संदेह से कुछ लोगों की मदद से थाना पकड़कर लाया जहां बच्ची के परिजन ने छुब्ध के खिलाफ बच्चा चोर होने की लिखित सूचना दी, सूचना के बाद छुब्ध व्यक्ति से पूछ ताछ की जा रही है , संदेहास्पद व्यक्ति अपना नाम अलग अलग बता रहा है ,, फिर हॉल पूछताछ में अपना नाम एल अप्पा पिता सांगप्पा जिला बीजापुर कर्नाटका कक्षा 10 वी तक किसी अम्बेडकर स्कूल में पढ़ना बता रहा है।

वही बच्ची को क्यों बुलाया पूछा गया तो अपना रिस्तेदार के रिस्तेदार होना समझकर बुलाना बताया गया। वहीं उनके पास रखे थैले को भी चेक किया गया तो कुछ कपड़ों के साथ मुँह में रखने का मास्क और कॉन्डोम का खाली डिब्बा मिला , वही पुलिस ने आगे कार्यवाही करते हुए छुब्ध व्यक्ति की मेडिकल जाँच के लिए भेज जाँच में जुट गई है।

वही दूसरी ओर बिलाईगढ़ टी आई मौर्य से बात करने पर बताया कि यह पिछले रात से पुरगांव में घूमते पाया गया था जिनकी सूचना ग्रामीणों द्वारा देकर बताया गया था, इनकी मानसिक संतुलन ठीक नही है और कुछ पूछने पर कर्नाटक , कर्नाटक बता रहा है तो उन्हें खाना खिलाकर कहीं भेज दीजिए परेशान मत कीजिए बोला गया जिसके बाद आज वही व्यक्ति बाँस उरकुली में मिला है जो अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है।

लोगों का पूछताछ कर सही स्थान पर नही भेज रहे

सबसे बड़ी बात की जब इस तरह के लोग क्षेत्र में घूमते नजर आ रहे है तो क्यों पुलिस प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों का पूछताछ कर सही स्थान पर नही भेज रहे है, क्यों मानसिक और छुब्ध किस्म के है कहकर पल्ला झाड़ देती है, ऐसे में कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे है, क्यों न पुलिस प्रशासन के द्वारा पहल करते हुए छुब्ध किस्म के लोगों को धरपकड़ कर मानसिक रोग के ईलाज हॉस्पिटल बिलासपुर सेन्द्री भेजी जानी चाहिए तांकि ऐसे लोग बच्चा चोर के संदेह में न आवे और ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रही बच्चा चोरों जैसे अफवाहों से बच सके।

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