अनजान, अनाथ शिशुओं के लिए दिखा माताओं का वात्सल्य, किया अपना दुग्ध दान

माताओं को खो चुके शिशुओं को कुपोषण से बचाने की एक शानदार पहल

सूरत।

अनाथ बच्चों को अपनी माताओं का दूध न मिल पाना उनमें कुपोषण और शारीरिक—मानसिक विकास संबंधी कई समस्याओं की जड़ होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए यहां के कुछ संगठनों ने एक शानदार पहल की है।

यशोदा मिल्क बैंक, कच्छ कड़वा पाटीदार समाज महिला मंडल, गुजरात मिल्क डोनेशन कैंप और सूरत पीडियाट्रिक एसोसिएशन ने ऐसे बच्चों को ध्यान में रखते हुए यहां एक दुग्ध दान शिविर आयोजित किया।

इस शिविर में 130 महिलाओं ने अपना दूध दान किया। इसे एक अनूठा और मानवता से ओत—प्रोत पहल मानते हुए कई अन्य जिलेे के संगठनों ने भी अनाथ—बेसहारा और कुपोषित बच्चों की तंदुरुस्ती के लिए माताओं का दूध संग्रह करने के लिए ऐसे ही शिविर आयोजित करने का मन बनाया है।

इस शिविर के बाद पत्रकारों से बातचीत में आयोजकों ने बताया कि नवजात शिशुओं को माता का दूध उपलब्ध करवाना उनके भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिन शिशुओं ने जन्म के समय ही अपनी मां को खो दिया है, उनके लिए समाज जिम्मेदारी महसूस करते हुए इस प्रकार के कदम उठाए तो कुपोषण की समस्या की जड़ पर प्रहार किया जा सकता है।

मां का दूध बच्चों को न सिर्फ बेहतरीन पोषण देता है, बल्कि मां का स्तनपान करने वाले बच्चे आने वाले जीवन में भी कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में पूरी तरह से सक्षम होते हैं। खास तौर पर भारत में होने वाली बड़ी संख्या में शिशुओं की मृत्यु के लिए जिम्मेदार मानी जानेवाली आंत की बीमारी नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस से भी उन्हें मुक्ति मिलती है।

आयोजकों ने बताया​ कि माताओं से संग्रहित दूध सुरक्षित भंडारण के लिए यशोदा मानव दुग्ध बैंक के डीप फ्रीजर में रखवा​ दिया गया है। यह दुग्ध बैंक सूरत म्यूनिसिपल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एसएमआईएमईआर) के परिसर में ही स्थापित होने की वजह से संग्रहित दूध का बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा ताकि यह उचित समय पर जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जा सके।

इस पहल का महत्व इस मायने में बढ़ जाता है कि इस समय केंद्र सरकार ने पूरे देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए पोषण अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान से अलग सूरत की सिविल सोसाइटी ने मातृ दुग्ध संग्रह की जो पहल की है उसे राष्ट्रीय अभियान में शामिल करने की बात सोची भी नहीं गई थी। यह उसी दिशा में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण इशारा भी माना जा रहा है।

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