राजधानी से 50 किमी दूर गांव में 17 हाथियों का दल

नन्हे हाथी को बचाने में जुटी टीम

रायपुर।

महासमुंद जिले के 17 हाथियों का दल महानदी को पार करने में कामयाब हो गया। शनिवार की सुबह जैसे ही महासमुंद-रायपुर और नया रायपुर के वन अफसरों को इसकी जानकारी मिली सभी ने महानदी के मुहाने पर बसे चपरीद गांव की तरफ दौड़ लगा दी। इस दौरान यहां हाथी का महीने भर का एक बच्चा बुरी तरह से जख्मी दिखाई दिया। वन अमले ने भारी मशक्कत के बाद उसे नदी से निकाला।

तत्काल सूचना जंगल सफारी के पशु चिकित्सक डॉ. जेपी जड़िया को दी। वे अपनी टीम के साथ पहुंचे और सुबह से देर शाम तक नदी के किनारे ही नन्हे हाथी का इलाज किया। इस दौरान 16 हाथी नदी के किनारे डेरा डाले हुए थे। वे अपने घायल साथी पर नजर रखे हुए थे। डॉ. जड़िया ने बताया कि नन्हे हाथी का बच पाना मुश्किल है, क्योंकि उसके जख्म गहरे हैं और कीड़े पड़ चुके हैं। हाथी रायपुर से 50 किमी की दूर पर हैं।

अंधेरा होने की वजह से वन विभाग की टीम दूर से ही सारी रात हाथियों के दल पर नजर जमाए हुए थी। दल नन्हे हाथी को घेरे हुए थे, उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे। दूसरे तरफ यह दल आरग हाइवे पार न करे इसे लेकर रायपुर वन अमला मुस्तैद था। वन अफसरों के मुताबिक दल के बढ़ने की दिशा रायपुर शहर की तरफ ही है। यह वही दल है जो बीते साल भर से आ-जा रहा है। हाथियों के दल के इस मूवमेंट से समूचे क्षेत्र में दहशत है, रतजगा होगा।

ग्रामीणों ने बताया कि 16 हाथियों का दल ग्राम कुकराडीह के पास था। वहीं एक दंतैल हाथी के लहंगर जंगल में होने की खबर है। इन हाथियों का दल शाम ढलते ही खेत की ओर निकल रहे हैं। हाथियों का दल पिछले तीन चार दिनों से जोबा, अछोला-अछोली गांव के खेत में पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही हाथी आगे की ओर मूवमेंट कर महानदी पार करके आरंग क्षेत्र के गांव चपरीद में आज सुबह से डेरा जमाए हुए हैं।

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