ज्योतिष

भारत का ऐसा मंदिर जहां नाग-नागिन का जोड़ा करता है शिंवलिंग का अभिषेक

संगमेश्वर महादेव का मंदिर पिहोवा से चार किलोमीटर दूर अरुणाय गांव में स्थित

देवो के देव महादेव भगवान शिव हिंदू धर्म के प्रमुख देवता हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि कई नामों से भी जाना जाता है।

भगवान शिव के अनेक नामों की तरह ही दुनिया भर में इनके हज़ारो मंदिर हैं। मान्यताओं के अनुसार देश में ऐसे कई स्थान हैं, जहां शिव शंभू स्वयं शिवलिंग के रूप में प्रकट हैं।

एक ऐसा ही संगमेश्वर महादेव का मंदिर पिहोवा से चार किलोमीटर दूर अरुणाय गांव में स्थित है, जहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। हर साल यहां शिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

वहीं हर महीने त्रयोदशी पर मंदिर में लोगों की भीड़ लगी रहती है। इसके अलावा सावन माह में दिनभर श्रद्धालु मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि शिव जिसकी भक्ति से खुश हो जाते हैं उन्हें मनवांछित फल देते हैं। तो आइए आज हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातें बताते हैं।

माना जाता है कि जब ऋषि वशिष्ठ और ऋषि विश्वामित्र में अपनी श्रेष्ठता साबित करने की जंग हुई तो ऋषि विश्वामित्र ने मां सरस्वती की सहायता से बहा कर लाए गए ऋषि वशिष्ठ को मारने के लिए शस्त्र उठाया, तभी मां सरस्वती ऋषि विशिष्ट को वापस बहा कर ले गई।

जिसके बाद ऋषि विश्वामित्र ने माता सरस्वती को रक्त व पींप सहित बहने का श्राप दे दिया। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए मां सरस्वती ने शिव की अराधना की थी।

भगवान शंकर के आशीर्वाद से प्रेरित 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ द्वारा अरूणा नदी व सरस्वती का संगम कराया जिसके बाद उन्हें इस श्राप से मुक्ति मिली। नदियों के संगम के कारण ही इस प्राचीन मंदिर का नाम संगमेश्वर महादेव पड़ा।

लोक मान्यता है कि यहां हर साल नाग-नागिन का जोड़ा आता है और शिवलिंग की पूजा करके चले जाता है। खास बात यह है कि इस जोडे़ ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।

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भारत का ऐसा मंदिर जहां नाग-नागिन का जोड़ा करता है शिंवलिंग का अभिषेक
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