भारत का एक ऐसा गांव जहां-जहां हर कदम पर रहते है जहरीले सांप

मेंढक की कमी के चलते सांपों ने पास खेतों और मैदानों को छोड़ द्वीप पर बने घरों की और रुख करना शुरू कर दिया

आंध्र प्रदेश के इस छोटे से द्वीप पर जब सांपों के काटने की संख्या तेजी से बढ़ने लगी तो कृष्णा नदी के किनारे मोपी देवी में बने भगवान सु्ब्रमन्यम मंदिर में पुजारियों ने पूजा अर्चना की।

इसके लिए 17 पंडितों ने सांपों को शांत करने के लिए यज्ञ किया। इस दौरान कृष्णा जिले में डिविसेमा के छोटे द्वीप पर लोगों ने सांपों से बचने के लिए क्षमा याचना भी की।

आए दिन कोई न कोई इनका शिकार बन रहा है। द्वीप पर सांपों की संख्या अचानक क्यों बढ़ गई, इसका कारण जानने की कोशिश की जा रही है।

माना जा रहा है कि मेंढक की कमी के चलते सांपों ने पास खेतों और मैदानों को छोड़ द्वीप पर बने घरों की और रुख करना शुरू कर दिया है। इंसानी बस्तियों में इनके प्रवेश से हाहाकार मचा है। हालात बेहद नाजुक बन गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इलाके में मेंढ़कों की कमी इसलिए हुई क्योंकि लोगों ने उनका शिकार करना शुरू कर दिया था और उन्हें अवैध रूप से चीन भेजना शुरू कर दिया था। इस चलते सांपों ने बस्तियों की ओर रुख कर लिया। इस कारण सांपों के काटने की संख्या बढ़ गई।

कहा जाता है कि यहां पिछले चार दशक से मनुष्य और सांपों की लड़ाई चली आ रही रही है। यह द्वीप एक दुर्लभ पारिस्थितिक क्षेत्र है।

कृष्णा नदी और बंगाल की खाड़ी से घिरा यह इलाका जंगली जानवरों का बसेरा है। यह तकरीबन 708.80 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसके अन्तर्गत तीन मंडल आते हैं जिनका नाम कोडुरु, अविनीगड्डा और नागायालंका है।

इस द्वीप पर अचानक सांपों के यूं आक्रमक होने के पीछे का कारण मेंढ़कों का अवैध व्यापार ही है। इस बाबत एक विशेषज्ञ ने कहा है कि द्वीप पर लगभग एक दशक तक अवैध मेंढक व्यापार होता रहा है।

यह 2010 की शुरुआत तक खत्म हो गया क्योंकि मेंढक काफी कम हो गए। उसके बाद से लेकर अब तक यहां आमतौर पर मानसून के दौरान सांपों के काटने का मामले बढ़े हैं।

यहां रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी आफत तो तब खड़ी होती है जब कभी यहां कृष्णा नदी में बाढ़ आती है। बाढ़ के दौरान नदीं के पानी में सांप ज्यादा सक्रीय हो जाते हैं। ‘

इस दौरान सांप धान के खेतों में घुस जाते हैं। यहां से वे लोगों की बस्तियों तक आ जाते हैं। अब ये यहां के लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन चुका

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